माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २७४ ) माधवनिदान । रोमांतिकाके लक्षण । रोमकूपोन्नतिसमा रागिण्यः कफपित्तजाः । कासारोचकसंयुक्ता रोमांत्यो ज्वरपूर्विकाः ॥ १३ ॥ कफपित्तसे केशों ( बालों ) के छिद्रके समान बारीक और लाल ऐसी मसूरिका होयँ, इनके होनेसे खांसी, अरुचि होय तथा इनके होनेसे पहिले ज्वर होय, इनको रोमांतिका ( कसूमीमाता ) ऐसे कहते हैं ॥ रसादि सप्त धातु । रसगतमसूरिकाओंके लक्षण । तोयबुद्बुदसंकाशास्त्वग्गताश्च मसूरिकाः । स्वल्पदोषाः प्रजायंते भिन्नास्तोयं स्रवंति च ॥ १४ ॥ रसगत मसूरिका पानीके बबूलेके सदृश हों, इनके फूटनेसे पानी बहे, वह त्वग्गत मसूरिका है, कारण इसका यह है कि दोष स्वल्प हैं ॥ रक्तगतमसूरिकाके लक्षण । रक्तस्था लोहिताकाराः शीघ्रपाकास्तनुत्वचः । साध्या नात्यर्थदुष्टास्तु भिन्ना रक्तं स्रवंति च ॥ १५ ॥ रुधिरगत मसूरिका तांबेके रंगकी, जल्दी पकनेवाली होती हैं, उनके ऊपरकी त्वचा पतली होय है, यह अत्यन्त दुष्ट नहीं होनेसे साध्य होय और इनके फूटनेसे इनमेंसे रुधिर निकले ॥ मांसगतके लक्षण । मांसस्थाः कठिनाः स्निग्धाश्चिरपाकास्तनुत्वचः । गात्रशूलोऽरतिः कंपमूर्च्छादाहतृषान्विताः ॥ १६ ॥ मांसस्थ मसूरिका कठिन चिकनी होय हैं, ये बहुत दिनमें पकें तथा इनकी त्वचा पतली होय, अंगोंमें शूल होय, चैन पडे नहीं, खुजली चले, मूर्च्छा, दाह और प्यास ये लक्षण होते हैं ॥ मेदोगतके लक्षण । मेदो जा मंडलाकारा मृदवः किंचिदुन्नताः । घोरज्वरपरीताश्च स्थूलाः कृष्णाः सवेदनाः ॥ संमोहारतिसंतापाः कश्चिदाभ्यो विनिस्तरेत् ॥ १७ ॥
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