भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( २८१ ) विदारीकंदके समान गोल, कांखमें अथवा वंक्षणस्थानमें जो गांठ तांबेके रंगकीसी होय उसको विदारिका कहते हैं, यह सन्निपातसे होय है, इसमें तीनों दोषोंके लक्षण होते हैं ॥ शर्करा । प्राप्य मांसशिरास्नायु श्लेष्मा मेदस्तथाऽनिलः । ग्रंथिं करोत्यसौ भिन्नो मधुसर्पिर्वसानिभम् ॥ २१ ॥ स्रवत्यास्रावमनिलस्तत्र वृद्धिं गतः पुनः । मांसं विशोष्य ग्रथितां शर्करां जनयेत्ततः ॥ २२ ॥ कफ मेद वायु ये मांस शिरा और स्नायु इनमें प्राप्त हों गांठ बांधते हैं, जब वह फूटे तब उसमेंसे शहद, घृत, चर्बी इनके समान स्राव हो तिसकरके वायु पुनः बढ़- कर मांसको सुखाय उसकी बारीक खिंचीसी गांठ करे, उसको शर्करा कहते हैं ॥ शर्करार्वुदके लक्षण । दुर्गन्धि क्लिन्नमत्यर्थं नानावर्णं ततः शिराः । सृजंति रक्तं सहसा तद्विद्याच्छर्करार्वुदम् ॥ २३ ॥ शर्करा होनेके अनन्तर नाडियोंसे दुर्गन्ध क्लेदयुक्त अनेक प्रकारके घृत, मेद और वसा इनके वर्णका रुधिर स्रवै, उसको शर्करार्वुद कहते हैं परन्तु भोजने शर्करार्वुदको शर्करा रोगके अंतर्गत कहा है ॥ पाददारीके लक्षण । परिक्रमणशीलस्य वायुरत्यर्थरूक्षयोः । पादयोः कुरुते दारीं पाददारीं तमादिशेत् ॥ २४ ॥ जिस पुरुषको बहुत चलना पडे है उसके पैर वायुके योगसे अत्यन्त रूक्ष होकर विदीर्ण हों ( फाटें ) उसको पाददारी कहते हैं अर्थात् विवाई कहते हैं । विपादिका कुष्ठ फटे नहीं है, यह फूट निकले है, यह इनमें भेद जानना ॥ कदर ( ठेक ) के लक्षण । शर्करोन्मथिते पादे क्षते वा कंटकादिभिः । ग्रंथिः कोलवदुत्सन्नो जायते कदरं तु तत् ॥ २५ ॥ १ तमेव भिन्नदुर्गन्धं घृतमेदोगिभं शिराः । स्रवंति स्रावमनिशं तदा स्याच्छर्करार्वुदम् ॥१॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA