माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 318, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३०० ) माधवनिदान । शतघ्नीके लक्षण । वर्त्तिर्घना कण्ठनिरोधिनी या चिताऽतिमात्रं पिशितप्ररोहैः । अनेकरुक् प्राणहरी त्रिदोषा ज्ञेया शतघ्नी तु शताग्निरूपा ॥ ५२ ॥ कंठमें लम्बी और कठिन सूजन होयँ तथा उसमें तोद ( चोटनी ) दाह खुजली आदि अनेक वेदना होयँ, यह प्राण हरनेवाली सूजनको शतघ्नी ( लंबे लंबे कांटे जिसमें होयँ ऐसे शस्त्र अथवा तोप ) के समान होय इसीसे रोगको यह संज्ञा दी है ॥ गिलायुके लक्षण । ग्रन्थिर्गले त्वामलकास्थिमात्रः स्थिरोऽल्परुक्स्यात्कफरक्तमूर्तिः । संलक्ष्यते सक्तमिवाशनं च स शस्त्रसाध्यस्तु गिलायुसंज्ञः ॥ ५३ ॥ कफरक्तके कोपसे गलेमें आंवलेकी गुठलीके बराबर गांठ उत्पन्न होवे, वह गांठ कठिन, मन्द पीडावाली हो, इसके होनेसे अन्न गलेमें अटकतासा मालूम देवे । यह रोग शस्त्रके द्वारा अर्थात् शस्त्रसे काटनेसे साध्य होय इसको गिलायु कहते हैं ॥ गलविद्रधिके लक्षण । सर्वं गलं व्याप्य समुत्थितो यः शोथो रुजः सन्ति च यत्र सर्वाः । स सर्वदोषो गलविद्रधिस्तु तस्यैव तुल्यः खलु सर्वजस्य ॥ ५४ ॥ जो सूजन सब गलेमें व्याप्त होवे तथा जिसमें सर्व प्रकारकी पीडा होय वह विद्रधिनिदानमें जो त्रिदोषकी विद्रधि कही है उसके समान गलविद्रधिके लक्षण जानना ॥ गलौघके लक्षण । शोथो महानन्नजलावरोधी तीव्रज्वरो वायुगतेर्निहन्ता । कफेन जातो रुधिरान्वितेन गले गलौघः परिकीर्त्यतेऽसौ ॥ ५५ ॥ रक्तयुक्त कफसे गलेमें भारी सूजन होय, उसके योगसे कण्ठमें अन्न जलका अव- रोध ( रुकावट ) होय तथा वायुका संचार होय नहीं, इसको वैद्य गलौघ कहते हैं॥ स्वरघ्नके लक्षण । यस्ताम्यमानः श्वसिति प्रसक्तं भिन्नस्वरः शुष्कविमुक्तकण्ठः । कफोपदिग्धेष्त्वनिलायनेषु ज्ञेयः स रोगः श्वसनात्स्वरघ्नः ॥ ५६ ॥ वायुका मार्ग कफसे लिप्त होनेसे बारबार नेत्रोंके आगे अन्धकार आकर जो पुरुष श्वासको छोडे अथवा मूर्च्छा आकर जिसकी श्वास निकले, जिसका भिन्न स्वर होय, कण्ठ सूखे और ' विमुक्त ' कहिये कण्ठ स्वाधीन न हो अर्थात् थोडा भी अन्न खाया हो तथापि कण्ठसे नीचे न उतरे, इस वातज रोगको स्वरघ्न कहते हैं ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA