माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३०३ ) बाधिर्य ( बहरा ) के लक्षण । यदा शब्दवहं वायुः स्रोत आवृत्य तिष्ठति । शुद्धश्लेष्मान्वितो वापि बाधिर्यं तेन जायते ॥ ३ ॥ जिस समय केवल वायु अथवा कफयुक्त वायु शब्द बहानेवाली नाडियोंमें स्थित होय, तब उस पुरुषके शब्द सुनाई नहीं देय अर्थात् बहरा हो जाय ॥ कर्णक्ष्वेडके लक्षण । वायुः पित्तादिभिर्युक्तो वेणुघोषसमं स्वनम् । करोति कर्णयोः क्ष्वेडं कर्णक्ष्वेडः स उच्यते ॥ ४ ॥ पित्तादि दाहकरके युक्त वायुसे कानोंमें वेणु ( बंसी ) का शब्द सुनाई देता है उसको कर्णक्ष्वेड कहते हैं ॥ कर्णस्रावके लक्षण । शिरोऽभिघातादथ वा निमज्जतां जले प्रपाकादथवापि विद्रधेः । स्रवेद्धि पूयं श्रवणोऽनिलार्दितः स कर्णसंस्राव इति प्रकीर्तितः ॥५॥ शिरमें किसी प्रकारकी चोट लगनेसे अथवा पानीमें गोता मारनेसे अथवा कानमें विद्रधि पकनेसे वायु कुपित होकर कानोंसे राध बहे उसको कर्णस्राव कहते हैं ॥ कर्णकण्डूके लक्षण । मारुतः कफसंयुक्तः कर्णकण्डूं करोति च । कफसे मिला वायु कानोंमें खुजली उत्पन्न करता है ॥ कर्णगूथके लक्षण । पित्तोष्मशोषितः श्लेष्मा जायते कर्णगूथकः ॥ ६ ॥ पित्तकी गरमीसे कफ सूखकर कानमें मैल जमे, उसको कर्णगूथ कहते हैं ॥ कर्णप्रतिनाहके लक्षण । स कर्णगूथो द्रवतां यदा गतो विलायितो घ्राणमुखं प्रपद्यते । तदा स कर्णप्रतिनाहसंज्ञितो भवेद्विकारः शिरसोऽर्द्धभेदकृत् ॥ ७ ॥ वही कानका मैल पतला होनेसे, अथवा स्नेह स्वेदादिकोंकरके पतला होकर मुख और नाकमें प्राप्त होय, तब उसको कर्णप्रतिनाह कहते हैं, इस रोगसे अर्द्धशिर ( आधासीसीका ) विकार होता है ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA