माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ३२८ ) माधवनिदान । शुक्तिरोगके लक्षण । श्यावाः स्युः पिशितनिभास्तु बिंदवो ये शुक्त्याभाः सितनियताः स शुक्तिसंज्ञः ॥ नेत्रके सफेद भागमें श्यामवर्ण मांसतुल्य सीपीके समान जो बिन्दु होय उसको शुक्ति कहते हैं ॥ अर्जुनके लक्षण । एको यः शशरुधिरोपमश्च बिन्दुः शुक्लस्थो भवति तदर्जुनं वदंति ॥ ६९ ॥ शुक्लभागमें शश (खरगोश) के रुधिरके समान जो बिन्दु (बून्द) नेत्रमें उत्पन्न होय उसको अर्जुन कहते हैं ॥ पिष्टकके लक्षण । श्लेष्ममारुतकोपेन शुक्ले मांसं समुन्नतम् । पिष्टवत्पिष्टकं विद्धि मलाक्तादर्शसन्निभम् ॥ ७० ॥ कफ वायुके कोपसे शुक्लभागमें पिष्ट (पिसासा) जो मांस बढे उसको पिष्टक कहते हैं, वह मलसे मिले आदर्श (ऐनक) के समान होता है ॥ जालके लक्षण । जालाभः कठिनशिरो महान् सरक्तः संतानः स्मृत इह जालसंज्ञितस्तु ॥ नेत्रके सफेद भागमें शिरा (नस) का समूह जालीके समान होय और वह कठिन तथा रुधिरके समान लाल होवे उसको जाल कहते हैं ॥ शिराजपिडिकाके लक्षण । शुक्लस्थाः सितपिडिकाः शिरावृता या- स्ता ब्रूयादसितसमीपजाः शिराजाः ॥ ७१ ॥ नेत्रके शुक्लभागमें शिरा (नसों) से व्याप्त ऐसी सफेद फुन्सी होय, उसको शिराजपिडिका कहते हैं वह कृष्णभागके समीप होती है ॥ बलासके लक्षण । कांस्याभोऽमृदुरथ वारिबिन्दुकल्पो विज्ञेयो नयनसिते बलाससंज्ञः ॥ ७२ ॥ १ मारुता पीडितः श्लेष्मा शुक्लभागे व्यवस्थितः । जलबिन्दुरिवोच्छूनोऽमृदुः स कफसम्भवः ।१ वलासग्रथितं नाम त शाफ दृष्टमादिशेत् ॥