माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३३१ ) कुंभिकाके लक्षण। वर्त्मान्ते पिडिका ध्माता भिद्यन्ते च स्रवंति च । कुंभीकबीजसदृशाः कुंभीकाः सन्निपातजाः ॥ ८० ॥ पलकोंके समीप कुंभिकाके बीजके समान अर्थात् जमालगोटेके समान फुन्सी होय वह पककर फूटकर बहे उसको कुंभिका कहते हैं। कोई आचार्य कहते हैं कि, कच्छदेशमेंके दाडिम ( अनार ) के बीजके आकार कुंभिका होती है ॥ पोथकीके लक्षण । स्राविण्यः कण्डुरा गुर्व्यो रक्तसर्षपसन्निभाः । रुजावन्त्यश्च पिडिकाः पोथक्य इति कीर्तिताः ॥ ८१ ॥ जिसके कोएमें लाल सरसोंके समान रुधिरस्राव हो, खुजलीसंयुक्त भारी तथा पीडासंयुक्त फुन्सी होय, उसको पोथकी कहते हैं ॥ वर्त्मशर्कराके लक्षण । पिडिका या खरा स्थूला सूक्ष्माभिरभिसंवृता । वर्त्मस्था शर्करा नाम स रोगो वर्त्मदूषकः ॥ ८२ ॥ जिसके कोएमें जो पिडिका कठिन और बडी होकर सर्वत्र छोटी २ फुन्सियोंसे व्याप्त होय, उसको वर्त्मशर्करा कहते हैं, इससे कोए बिगड जाते हैं ॥ अर्शोवर्त्मके लक्षण । उर्वारुबीजप्रतिमाः पिडिका मंदवेदनाः । श्लक्ष्णाः खराश्च वर्त्मस्थास्तदर्शोवर्त्म कीर्त्यते ॥ ८३ ॥ ककडीके बीजके बराबर, मन्द पीडा पृथकू २ कठिन ऐसी फुन्सी कोएमें उठें उनको अर्शोवर्त्म कहते हैं । निमि (विदेहँ) के मतसे यह सन्निपातात्मक है ॥ शुष्कार्शके लक्षण । दीर्घाङ्कुरः खरः स्तब्धो दारुणोऽभ्यन्तरोद्भवः । व्याधिरेषोऽतिविख्यातः शुष्कार्शो नाम नामतः ॥ ८४ ॥ नेत्रके कोएमें लंबे खरदरे कठिन दुःखदायक ऐसे जो मांसांकुर होयँ उस व्याधिको शुष्कार्श कहते हैं, यह भी सन्निपातज है ॥ अंजनाके लक्षण । दाहतोदवती ताम्रा पिडिका वर्त्मसंभवा । मृद्वी मंदरुजा सूक्ष्मा ज्ञेया साऽञ्जनामिका ॥ ८५ ॥ १नीरुजा कठिना वर्त्मपक्ष्मान्तर्बाह्यतोऽपि वा। पिडिका सन्निपातेन तदर्शोवर्त्म कीर्त्यते॥ इति॥