भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ३४३ ) अत्यानन्दा न सन्तोषं ग्राम्यधर्मेण गच्छति । कर्णिन्‍यां कर्णिकायोनौ श्लेष्मासृग्भ्यां प्रजायते ॥ ८ ॥ मैथुनाचरणात्पूर्वं पुरुषादतिरिच्यते । बहुशश्चातिचरणा तयोर्बीजं न विन्दति ॥ ९ ॥ श्लेष्मला पिच्छिला योनिः कण्डूयुक्ताऽतिशीतला । चतसृष्वपि चाद्यासु श्लेष्मलिङ्गोच्छ्रयो भवेत् ॥ १० ॥ जो योनि अति मैथुनसे भी सन्तोषको प्राप्त न होवे, उसको अत्यानन्दा कहते हैं, जिसमें कफ रुधिर करके कर्णिका ( कमलके भीतर जो होता है ऐसा मांसकन्द ) हो, उसको कर्णिणी कहते हैं, जो योनि थोडे मैथुनसे पहले स्रवे उसको चरणा कहते हैं अर्थात् जबतक पुरुषको सुख नहीं हो उसके पहलेही द्रवीभूत होकर वीर्यका ग्रहण नहीं करे, जो योनि बहुवार मैथुन करनेसे पुरुषके पीछे द्रवे ( छूटे ) उसको अति- चरणा योनि कहते हैं यह कफजनित हैं ॥ स्राव और पातके लक्षण । आचतुर्थात्ततो मासात्प्रस्रवेद्गर्भविद्रवः । ततः स्थिरशरीरः स्यात्पातः पञ्चमषष्ठयोः ॥ ११ ॥ पांच मास पर्यन्त गर्भ पतली अवस्थामें होनेसे जो स्रवे उसे स्राव कहते हैं और चौथे महीनेसे लेकर पांचवें छठे महीनेपर स्राव और शरीर बननेपर निकले उसे पात कहते हैं ॥ गर्भ अकालमें कैसे गिरे ? इस विषयमें निदानपूर्वक दृष्टान्त । गर्भोऽभिघातविषमाशनपीडनाद्यैः पक्वं द्रुमादिव फलं पतति क्षणेन । अभिघात ( चोट ), विषमाशन ( विषमभोजन ), पीडनादिक इन कारणोंसे जैसे पकाहुआ फल वृक्षसे चोट लगनेसे क्षणभरमें गिरजाता है इसी प्रकार गर्भ अभि- घातादि कारणोंसे गिरता है ॥ प्रसूत होते समय मूढगर्भ कैसे होता है ? उसके लक्षण । मूढःकरोति पवनःखलु मूढगर्भं शूलं च योनिजठरादिषु मूत्रसंगम् १२ मूढ ( कुंठितगति ) वायु गर्भको मूढ ( टेढा ) कर दे और योनि तथा पेट इनमें शूल तथा मूत्रोत्संग उत्पन्न करे ( धीरे धीरे पीडासहित मूत निकले ) ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA