भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 372

( ३५४ ) माधवनिदान । अंधपूतना ग्रहकी पीडासे बालकके वमन होय, खांसी, ज्वर, प्यास, चर्बीकीसी दुर्गंध, बहुत रोना,स्तन्य ( छातीको ) मुखसे दाबे नहीं, अतिसार यह लक्षण होते हैं॥ शीतपूतनाग्रहके लक्षण । वेपते कासते क्षीणो नेत्ररोगो विगंधिता । छर्द्यतीसारयुक्तश्च शीतपूतनया शिशुः ॥ २८ ॥ शीतपूतना ग्रहकी पीडासे बालकके मुखकी कांति क्षीण होजावे, उसके नेत्ररोग होय, देहमें दुर्गंध आवे, वमन होय और दस्त होयँ ॥ मुखमण्डिकाग्रहके लक्षण । प्रसन्नवर्णवदनः शिराभिरिव संवृतः । मूत्रगन्धिश्च बह्वाशी मुखमण्डिकया भवेत् ॥ २९ ॥ मुखमंडिका ग्रहकी पीडासे बालकक मुखकी कांति सुंदर होय और देहकी कांति श्रेष्ठ होय, शिराओंमें बँधा देह होजाय, उसके देहमें मूत्रकीसी दुर्गंध आवे यह बालक बहुत भक्षण करे ॥ नैगमेयग्रहके लक्षण । छर्दिःस्यन्दनकण्ठास्यशोषमूर्च्छाविगन्धिताः । ऊर्ध्वं पश्येदशेद्दन्तान्नैगमयेयग्रहं वदेत् ॥ ३० ॥ वमन, कफ, कंठ-मुखका सूखना, मूर्च्छा, दुर्गंध, ऊपरको देखे, दांतोंको चबावे इन लक्षणोंसे नैगमेयग्रहकी बाधा जाननी ॥ इति श्रीपण्डितदत्ताराममाथुरप्रणीतमाधवार्थदीपिकायां माथुरीभाषाटीकायां बालरोगनिदानं समाप्तम् ॥ अथ विषरोगनिदानम् । स्थावरं जंगमं चैव द्विविधं विषमुच्यते । मूलात्मकं तदाद्यं स्यात्परं सर्पादिसम्भवम् ॥ १ ॥ विष दो प्रकारका है-स्थावर और जंगम, तथा मूलात्मक स्थावर और सर्पादि- कोंसे जो प्रगट हो वह जंगम विष होता है ॥ दशाधिष्ठानमाद्यं तु द्वितीयं षोडशाश्रयम् । आद्य अर्थात् स्थावर विष दश जगह रहता है और जंगम विष सोलह जगह रहता है ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA