भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 384

( १६६ ) माधवनिदान । नीलशुक्र, रक्तबभ्रु, एकपर्वा, उपपर्वा ये घोर विषवाले १५ बिच्छू हैं। इनके काट- नेसे सर्पके समान वेग, फोडोंकी उत्पत्ति, भ्रांति, दाह, ज्वर, नाक कान आदिके छिद्रोंसे काला रुधिर निकले इसीसे शीघ्र प्राणत्याग होवे ॥ वृश्चिकविषके असाध्य लक्षण । दष्टोऽसाध्यस्तु हृद्घ्राणरसनोपहतो नरः । मांसैः पतद्भिरत्यर्थं वेदनात जहात्यसून् ॥ ४८ ॥ हृदय, नाक, जीभ इनमें बिच्छूके काटनेसे मांस गले, अत्यन्त वेदना होकर मनुष्य मरे ॥ कणभदष्टके लक्षण । विसर्पः श्वयथुः शूलं ज्वरश्छर्दिरथापि वा । लक्षणं कणभैर्दष्टे दंशश्चैवं विशीर्यते ॥ ४९ ॥ कणभ एक जातिका कीडा होता है उसके काटनेसे विसर्प, सूजन, शूल, ज्वर, वमन ये लक्षण होते हैं और वह काटनेका स्थान गलजाय ॥ अब कहते हैं कि, त्रिकंटक, कुणी, हस्तीकक्ष, अपराजित ये कणभकीडाके चार भेद हैं। इनके काट- नेसे पूर्वोक्त रोग होयँ और अंगोंका टूटना, देहमें भारीपन और काटनेकी ठौर काली होजाय ये लक्षण विशेष होयँ ॥ उच्चिटिंग ( झींगर ) विषके लक्षण । हृष्टरोमोच्चिटिंगेन स्तब्धलिंगो भृशार्तिमान् । दष्टः शीतोदकेनेव सिक्तान्यंगानि मन्यते ॥ ५० ॥ उच्चिटिंगनामक बिच्छूके काटने से देहमें रोमांच होय, लिंग जकड जाय, घोर पीडा होय और सब देहपर शीतल जल मानो डाल दिया है, उच्चिटिंगको सुश्रुत- वाला झींगर कहता है और कोई उष्ट्रधूम कहते हैं परन्तु आतंकदर्पण टीकाकारने बिच्छूका भेद माना है ॥ मंडूक ( मेंडक ) विषके लक्षण । एकदंष्ट्रार्दितः शूनः सरुजः पीतकः सतृट् । छर्दिर्निद्रा च सविषैर्मंडूकैर्दष्टलक्षणम् ॥ ५१ ॥ विषैले मेंडकके काटनेसे उसको एक दांत लगे, उस ठिकाने पीली सूजन होय, दूखे, प्यास, वमन और निद्रा ये लक्षण होयँ ॥ अब कहते हैं कि कृष्णसार, कुहक, हरित, रक्त, यववर्णाभ भुकुटी, कोटिक इन भेदोंसे मेंडक आठ प्रकारका है इनके काटनेसे पूर्वोक्त लक्षण होयँ और खुजली, मुखमें पीले झाग आना, इन CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA