भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( २९ ) ४ चित्तभ्रम । यदि कथमपि पुंसां जायते कायपीडा भ्रममदपरितापो मोह- वैकल्यभावः । विकलनयनहासो गीतनृत्यप्रलापी ह्यभिदधति असाध्यं केऽपि चित्तभ्रमाख्यम् ॥ ४ ॥ जिसके कोई प्रकार करके पीडा होय तथा भ्रम ( धतूरा खाये सरीखी अवस्था ) हो, सन्ताप, मोह, विकलता, नेत्रोंमें बेकली, हँसना, गाना, नाचना, बकना यें लक्षण होंय उसको कोई असाध्य ( चित्तभ्रम ) सन्निपात ऐसे कहते हैं ॥ ५ शीतांग । हिमसदृशशरीरो वेपथुः श्वासहिक्का शिथिलितसकलाङ्गः खिन्ननादोयतापः। क्लमथुदवथुकासच्छर्द्यतीसारयुक्तस्त्वरित- मरणहेतुः शीतगात्रप्रभावात् ॥ ५ ॥ शरीर बर्फके समान शीतल हो, कम्प, श्वास, हिचकी, सर्व अंग शिथिल हों, मन्द शब्द, देहके भीतर उग्र सन्ताप, अनायास श्रम, मनका सन्ताप, खांसी, छर्दि, अतीसार इन लक्षणोंयुक्त सन्निपातको ( शीतांग ) कहते हैं, यह प्राणोंका शीघ्र नाश करता है ॥ ६ तन्द्रिक । प्रभूतातन्द्रार्तिज्वरकफपिपासाकुलतरो भवेच्छ्यामा जिह्वा पृथुलकठिना कण्टकवृता । अतीसारः श्वासः क्लमथुपरितापः श्रुतिरुजो भृशं कण्ठे जाड्यं शयनमनिशं तन्द्रिकगदे ॥ ६ ॥ तन्द्रा बहुत हो, शूल ज्वर कफ तृषासे रोगी बहुत पीडित हो, जीभ कालें रंगकी मोटी कठोर और कांटेयुक्त हो और अतीसार श्वास ग्लानि सन्ताप कर्ण- शूल कण्ठमें जडता और रातदिन निद्रा ये लक्षण ( तन्द्रिक ) सन्निपातमें होते है यह असाध्य है ॥ ७ कण्ठकुब्ज । शिरोऽर्तिकण्ठग्रहदाहमोहकंपज्वरा रक्तसमीरणात्तिः । हनुग्रहस्तापविलापमूर्च्छाः स्यात्कण्ठकुब्जः खलु कष्टसाध्यः ॥ ७ ॥ शिरमें पीडा, कण्ठमें पीडा, दाह, बेहोशी, कम्प, ज्वर, वातरक्तसम्बन्धी पीडा हनुग्रह, सन्ताप, बकना और मूर्च्छा इन लक्षणोंसे युक्त सन्निपातको ( कंठकुब्ज ) कहते हैं, यह कष्टसाध्य है ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA