माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ३३ ) विषजन्य आगंतुकज्वर । श्यावास्यता विषकृते दाहोऽतीसार एव च । भक्तारुचिः पिपासा च तोदश्च सह मूर्च्छया ॥ २२ ॥ अब आगंतुकज्वरोंके हेतुभेद करके लक्षण कहते हैं—स्थावर जङ्गम विष भक्षण करनेसे जो ज्वर होय उससे मुख श्यामवर्ण और दाह तथा दस्तोंका होना, अन्नमें अरुचि, प्यास, सुई चुभनेकीसी पीडा और मूर्च्छा ये लक्षण होते हैं ॥ औषधगन्धजनित ज्वर । औषधीगन्धजे मूर्च्छा शिरोरुग्वमथुः क्षवः । तीक्ष्ण औषधके सूंघनेसे जो ज्वर होय उसमें मूर्च्छा, शिरमें पीडा, वमन, छींक ये लक्षण होते हैं ॥ कामज्वरके लक्षण । कामजे चित्तविभ्रंशस्तन्द्रालऽस्यमभोजनम् ॥ २३ ॥ हृदये वेदना चास्य गात्रं च परिशुष्यति । सुन्दर स्त्रीके देखनेसे मनुष्यके मनमें घोर कामबाधाकी उत्पत्ति हो, उससे प्रगट ज्वरके ये लक्षण हैं—चित्तकी अस्थिरता, तन्द्रा, आलस्य, भोजनमें अरुचि, हृदयमें पीडा और शरीर सूख जावे ॥ भय शोक और कोपज्वरके लक्षण । भयात्प्रलापः शोकाच्च भवेत्कोपाच्च वेपथुः ॥ २४ ॥ भयसे और शोकसे उत्पन्न ज्वरमें अनर्थ बके, कोपसे प्रगट ज्वरमें कम्प हो ॥ अभिचार और अभिघातज्वरके लक्षण । अभिचाराभिघाताभ्यां मोहस्तृष्णा च जायते । अभिचार और अभिघातसे प्रगट ज्वरमें मोह और तृष्णा होवे ॥ भूताभिषंगज्वरके लक्षण । भूताभिषङ्गादुद्वेगो हास्यरोदनकम्पनम् ॥ २५ ॥ भूतबाधासे उत्पन्न ज्वरसे चित्तमें उद्वेग हो, हँसे रोवे और कम्प ये लक्षण होते हैं ॥ कामशोकभयाद्वायुः क्रोधात्पित्तं त्रयो मलाः । भूताभिषङ्गात्कुप्यन्ति भूतसामान्यलक्षणाः ॥ २६ ॥ काम शोक और भय इनसे वातकुपित होता है, क्रोधसे पित्त कुपित होता है और भूताभिषंगसे तीनों दोष कुपित होते हैं इनमें और भी लक्षण होते हैं अर्थात् उन्माद, निदानमें जिस जिस देवग्रहोंके लक्षण हास्य रोदन कम्पादिक कहे हैं वे लक्षण होतेहैं ॥ ३