भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । (५७) डाक्टरीमतके अनुसार परीक्षा व कारण । आमसे मिला मल उतरे, दस्त होते समय गुदा शब्द करे ऐसे एक महीना अथवा अधिक दिवस पर्यंत पीडा हो ॥ कारण-भारी द्रव्यके खानेसे अथवा देहके दुर्बल होनेसे मनुष्यके संग्रहणीरोग होता है ॥ इति श्रीपंडितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थदीपिकामाधुरीभाषाटीकायां ग्रहणीरोगः समाप्तः ॥

अर्शोरोगनिदानम् । अतिसार ग्रहणी और अर्शका परस्पर सम्बन्ध है इससे ग्रहणीरोगके पीछे अर्शोरोग कहते हैं- संख्या रूप सम्प्राप्ति । पृथग्दोषैः समस्तैश्च शोणितात् सहजानि च । अर्शांसि षट्प्रकाराणि विद्याद्गुदवलित्रये ॥ १ ॥ पृथक् पृथक् दोषोंसे ३, समस्त दोष मिलकर १, रुधिरसे १ और सहज १ ऐसे छः प्रकारका अर्श ( बवासीर ) रोग है यह रोग गुदाकी तीन वलीके भीतर हो । गुदामें प्रवाहिणी विसर्जनी संवरणी यह तीन वली ( आँटे ) हैं ॥ सम्प्राप्तिपूर्वके अर्शका रूप । दोषास्त्वङ्मांसमेदांसि संदूष्य विविधाकृतीन् । मांसाङ्कुरानपानादौ कुर्वन्त्यर्शांसि तान् जगुः ॥ २ ॥ वातादि दोष त्वचा, मांस और मेदा इनको और उस ठिकानेके रुधिरको दूषित कर अपान (गुदा) में अनेक प्रकारकी आकृतिके मांसके अंकुर उत्पन्न करे अर्थात् मस्से प्रगट करे उसको बवासीर कहते हैं। आदिशब्दसे नाक, नेत्र, नाभिमें भी जानना, यह मत सुश्रुतका है। कायचिकित्सक तो गुदामें जो होय उसे बवासीर १ मनुष्यकी गुदामें तीन आंटे हैं एक ऊपर, एक नीचे क बीचमें। ऊपरके आंटेका नाम प्रवाहिणी है सो मल पवन आदिको बाहर काढे, बीचका आंटा मल पवनको बाहर पटक दे इसका नाम विसर्जनी है, तीसरा नीचेका आँटा मल पवन निकले पीछे ज्योंका त्यों गुदाको करदे तिसका नाम संवरणी है॥ २ गुदा साढे चार अंगुलकी होती है और गुदाके अवयवभूत तीन वली शंखके आवर्त समान प्रवाहिणी, विसर्जनी, संवरणीनामवाली ऊपर २ ही स्थित हैं। उसमें गुदाका ओष्ठ आधा अंगुलका होता है गुदोष्ठसे ऊपर प्रवाहिणी एक अंगुलकी और विसर्जनी डेढ अंगुलकी और संवरणीभी डेढ अंगुलकी होती है, इसी प्रकारसे गुदाका प्रमाण साढे चार अंगुलका होता है ।