भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( ६ ) माधवनिदानकी- विषय. पृष्ठांक. विषय. पृष्ठांक. छिन्नश्वासके लक्षण, तमकश्वासके लक्षण १०२ मदात्ययनिदानम् । प्रतमकके लक्षण १०३ विधिसे मद्य पीनेका लक्षण १२० प्रतमकके दूसरे लक्षण और कारण ,, विधिसे मद्य पीनेके दूसरे गुण १२१ क्षुद्रश्वासके लक्षण और साध्यासाध्य १०४ पूर्वमदके लक्षण, द्वितीय मदके लक्षण १२२ स्वरभेदनिदानम् । तृतीय मदके लक्षण, चतुर्थ मदके लक्षण ,, वातस्वरभेदके लक्षण, पित्तज स्वरभेदके लक्षण १०५ विधिहीन मद्यसेवनसे होनेवाले विकार १२३ कफके स्वरभेदके लक्षण ,, वातमदात्ययके लक्षण १२४ सन्निपातके स्वरभेदके लक्षण ,, पित्तमदात्ययके लक्षण, कफमदात्ययके लक्षण ,, क्षयजन्यस्वरभेदके लक्षण १०६ सन्निपात मदात्ययके लक्षण, परमदके लक्षण ,, मेदके स्वरभेदका लक्षण, असाध्य लक्षण ,, पानाजीर्णके लक्षण, पानविभ्रमके लक्षण १२५ अरोचकनिदानम् । पानविभ्रमके असाध्य लक्षण ,, वातजादि अरुचियोंके लक्षण १०६ पानविभ्रमके उपद्रव १२६ शोकादि अरुचिके लक्षण १०७ दाहनिदानम् । विकृतिके स्थानान्तर ,, मद्यजन्य दाहके लक्षण १२६ छर्दिर्निदानम् । रक्तज और पित्तज दाहके लक्षण ,, छर्दिके कारण और निरुक्ति १०८ प्यास रोकनेके लक्षण ,, छर्दिके पूर्वरूप, वातकी छर्दिके लक्षण ,, शस्त्राघातज दाहके लक्षण १२७ पित्तकी छर्दिके लक्षण, कफकी छर्दिके लक्षण १०९ धातुक्षयजन्यदाहके लक्षण ,, त्रिदोषकी छर्दिके लक्षण, असाध्य छर्दिके लक्षण ,, क्षतज दाहके लक्षण, मर्माभिघातज दाहके लक्षण ,, आगन्तुजछर्दिके लक्षण, कृमिकी छर्दिके लक्षण ११० अथोन्मादनिदानम् । कृमिके साध्यासाध्य लक्षण, कृमिके उपद्रव ,, उन्मादके सामान्य कारण और सम्प्राप्ति १२८ तृष्णानिदानम् । उन्मादका स्वरूप, विशेष लक्षण १२९ तृष्णाकी सम्प्राप्ति, अन्नजादि तृष्णाकी सम्प्राप्ति १११ पित्तज उन्मादके कारण और लक्षण ,, वातकी तृषाके लक्षण ११२ कफजन्य उन्मादके कारण और लक्षण १३० पित्तकी तृषाके लक्षण, कफकी तृषाके लक्षण ,, सन्निपात उन्मादके लक्षण ,, क्षतजतृष्णाके लक्षण, क्षयजतृष्णाके लक्षण ११३ शोकज उन्मादके लक्षण ,, आमजतृष्णाके लक्षण, अन्नजतृष्णाके लक्षण ,, विषजन्य उन्मादके लक्षण १३१ उपसर्गज तृषाके लक्षण, असाध्य तृषाके लक्षण ११४ विषज उन्मादके असाध्य लक्षण ,, मूर्च्छानिदानम् । भूतज उन्मादके लक्षण ,, निदान और सम्प्राप्ति ११५ देवग्रहजके लक्षण ,, मूर्च्छाका पूर्वरूप, वातकी मूर्च्छाके लक्षण ११६ असुर पीडितके लक्षण, गन्धर्वग्रहजके लक्षण १३२ पित्तकी मूर्च्छाके लक्षण, कफकी मूर्च्छाके लक्षण ,, यक्षग्रहजके लक्षण, पितृग्रहजके लक्षण ,, सन्निपातकी मूर्च्छाके लक्षण ११७ सर्पग्रहयुक्तके लक्षण १३३ रक्तकी मूर्च्छाके लक्षण ,, राक्षसग्रहपीडितके लक्षण ,, विष और मद्यसे उत्पन्न मूर्च्छा ११८ पिशाचजुष्टके लक्षण ,, रक्तजादितीन मूर्च्छाओंके लक्षण ,, प्रसंगवशसे ब्रह्मराक्षस और भूतोन्मादके ,, मूर्च्छा, भ्रम, तन्द्रा और निद्रा इनके भेद ,, ग्रन्थान्तरोंसे लक्षण ,, तन्द्राके लक्षण, संन्यासके भेद ११९ भूतोन्मादके लक्षण १३४ संन्यासके लक्षण ,, देवादिकोंका आवेशसमय ,, CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA