माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( ६५ ) मैले वस्त्रवाला, बुरा बोलनेवाला, अभिमानी, व्यवहारमें न समझे और जो बिना बुलाये आवे ये पांच वैद्य श्रीधन्वन्तरिके समान भी हों तो भी पूजने योग्य नहीं हैं ॥ रोगीके लक्षण । आयुष्मान् सत्त्ववान् साध्यो द्रव्यवानात्मवानपि । उच्यते व्याधितः पादो वैद्यवाक्यकृदास्तिकः ॥ ४३ ॥ आयुवाला, बलयुक्त साध्य, द्रव्यवान्, ज्ञानी, वैद्यका आज्ञाकारी और आस्तिक ऐसा रोगी होना चाहिये ॥ उत्तम औषधिके लक्षण । प्रशस्तदेशसंभूतं प्रशस्तेऽहनि चोद्धृतम् । अल्पमात्रं बहुगुणं गन्धवर्णरसान्वितम् ॥ ४४ ॥ उत्तम स्थानोंमें प्रगट हुई हो और शुभ दिनमें उसको उखाडी हो, थोडी मात्रा देनेसे बहुत गुण करे, दुर्गंधरहित, उत्तम स्वरूप और रसयुक्त हो सो औषधि उत्तम है ॥ दुष्ट औषधिके लक्षण । वल्मीककुत्सितानूपश्मशानोषरमार्गजाः । जन्तुवह्निहिमव्याप्ता नौषध्यः कार्यसाधकाः ॥ ४५ ॥ इतने स्थानकी औषधें कार्य करनेवाली नहीं होती हैं-बांबीकी, खोटी धरतीकी, जलके समीपकी, इमशानकी, ऊषरकी, जहां रेहं चूना निकलता होय तहांकी और रास्तेकी, कीडोंकी खाई, अग्निसे जली हुई, जाडेकी मारी ऐसी औषधें कार्य करने- वाली नहीं हैं ॥ दूतके लक्षण । स्निग्धोऽजुगुप्सुर्बलवान् युक्तो व्याधितरक्षणे । वैद्यवाक्यकृदश्रान्तः पादः परिचरः स्मृतः ॥ ४६ ॥ नवीन अवस्थाका, बलवान्, रोगीकी रक्षा करनेमें तत्पर होवे, वैद्यके वचनका करनेवाला होवे, आलस्यरहित ऐसा परिचारक अर्थात् दूत होय । इन पूर्वोक्तको चतुष्पाद सम्पत्ति कहते हैं सो यह आयु शेषके बिना नहीं मिलते ॥ ४ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA