भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 404 में से

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(७८) माधवनिदान । पित्तजपांडुरोगीके लक्षण । पीतमूत्रशकृन्नेत्रो दाहतृष्णाज्वरान्वितः । भिन्नविट्कोऽतिपीताभः पित्तपाण्डामयी नरः ॥ ५ ॥ पित्तपांडुरोगीके ये लक्षण होते हैं—मल मूत्र और नेत्र पीले हों, दाह, प्यास, ज्वर इनसे पीडित हो, मल पतला हो और उस रोगीके देहकी कांति अत्यन्त पीली होती है ॥ कफपांडुरोगीके लक्षण । कफप्रसेकश्वयथुतन्द्रालस्यातिगौरवैः । पाण्डुरोगः कफाच्छुक्लैस्त्वङ्‌मूत्रनयनाननैः ॥ ६ ॥ मुखसे कफका गिरना, सूजन, तन्द्रा, आलसक शरीरका भारी होना, त्वचा, मूत्र, नेत्र, मुख इनका सफेद होना इन लक्षणोंसे कफका पांडुरोग जानना ॥ सन्निपातयुक्त पांडुरोगके असाध्य लक्षण । ज्वरारोचकहृल्लासच्छर्दितृष्णाक्लमान्वितः । पाण्डुरोगी त्रिभिर्दोषैस्त्याज्यः क्षीणो हतेन्द्रियः ॥ ७ ॥ ज्वर, अरुचि, ओकारी ( उबकाई ), वमन, प्यास और क्लम इतने उपद्रवयुक्त जो त्रिदोषजन्य पांडुरोगी क्षीण होगया हो और जिसकी इंद्रियें अपना अपना विषय ग्रहण करनेकी शक्ति न रखती हों तो उसको वैद्य त्याग दे ॥ मिट्टीखानेसे प्रगट पांडुरोगकी सम्प्राप्ति । मृत्तिकादनशीलस्य कुप्यत्यन्यतमो मलः । कषाया मारुतं पित्तमूपरा मधुरा कफम् ॥८॥ कोपयेन्मृद्रसादींश्च रौक्ष्याद् भुक्तं च रूक्षयेत् । पूरयत्यविपक्कैव स्रोतांसि निरुणद्ध्यपि ॥ ९ ॥ इन्द्रियाणां बलं हत्वा तेजो वीर्यौजसी तथा। पाण्डु- रोगं करोत्याशु बलवर्णाग्निनाशनम् ॥ १० ॥ १ चरकमें लिखा है—सर्वान्नसेविनः सर्वे दुष्टा दोषास्त्रिदोषजम् । त्रिलिंगं संप्रकुर्वन्ति पांडुरोगं सुदुःसहम् ॥ सम्पूर्ण अन्नोंके सेवन करनेवाले पुरुषके तीनों दोष दुष्ट हुए त्रिदोषज पांडुरोगको करते हैं जिसमें तीनों दोषोंके लक्षण मिलते हैं उसको सन्निपातका पांडुरोग जानना और वह असाध्य है ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA

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