महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभीष्म उवाच
कथं ते तात जीवन्ति पाण्डोः पुत्रा महारथाः ।
कथमस्मत्कृते पक्षः पाण्डोर्न हि निपातितः ।।
कथं मत्प्रमुखाः सर्वे प्रमुक्ता महतो भयात् ।
जननी गरुडेनेव कुमारास्ते समुद्धृताः ।।
भीष्मजीने कहा—तात! पाण्डुके वे महारथी पुत्र कैसे जीवित बच गये? पाण्डुका
पक्ष किस तरह हमारे लिये नष्ट होनेसे बच गया? जैसे गरुड़ने अपनी माताकी रक्षा की थी,
उसी प्रकार तुमने किस तरह पाण्डुकुमारोंको बचाकर हम सब लोगोंकी महान् भयसे रक्षा
की है?
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु कौरव्य कौरवाणामशृण्वताम् ।
आचचक्षे स धर्मात्मा भीष्मायाद्भुतकर्मणे ।।
वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! इस प्रकार पूछे जानेपर धर्मात्मा विदुरने
कौरवोंके न सुनते हुए अद्भुत कर्म करनेवाले भीष्मजीसे इस प्रकार कहा—
विदुर उवाच
धृतराष्ट्रस्य शकुने राज्ञो दुर्योधनस्य च ।
विनाशे पाण्डुपुत्राणां कृतो मतिविनिश्चयः ।।
ततो जतुगृहं गत्वा दहनेऽस्मिन् नियोजिते ।
पृथायाश्च सपुत्राया धार्तराष्ट्रस्य शासनात् ।।
ततः खनकमाहूय सुरङ्गां वै बिले तदा ।
सगुहां कारयित्वा ते कुन्त्या पाण्डुसुतास्तदा ।।
निष्क्रामिता मया पूर्वं मा स्म शोके मनः कृथाः ।
निर्गताः पाण्डवा राजन् मात्रा सह परंतपाः ।।
अग्निदाहान्महाघोरान्मया तस्मादुपायतः ।
मा स्म शोकमिमं कार्षीर्जीवन्त्येव च पाण्डवाः ।।
प्रच्छन्ना विचरिष्यन्ति यावत् कालस्य पर्ययः ।।
तस्मिन् युधिष्ठिरं काले दक्ष्यन्ति भुवि भूमिपाः ।)
विदुर बोले—धृतराष्ट्र, शकुनि तथा राजा दुर्योधनका यह पक्का विचार हो गया था कि
पाण्डवोंको नष्ट कर दिया जाय। तदनन्तर लाक्षागृहमें जानेपर जब दुर्योधनकी आज्ञासे
पुत्रोंसहित कुन्तीको जला देनेकी योजना बन गयी, तब मैंने एक भूमि खोदनेवालेको
बुलाकर भूगर्भमें गुफासहित सुरंग खुदवायी और कुन्तीसहित पाण्डवोंको घरमें आग
लगनेसे पहले ही निकाल लिया, अतः आप अपने मनमें शोकको स्थान न दीजिये। राजन्!