महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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भरतश्रेष्ठ! महात्मा अग्निदेवके इस प्रकार आज्ञा देनेपर अर्जुन, श्रीकृष्ण तथा मयासुर सबने उनकी परिक्रमा की। फिर तीनों ही यमुनानदीके रमणीय तटपर जाकर एक साथ बैठे ॥ १८-१९ ॥
इति श्रीमहाभारते शतसाहस्र्यां संहितायां वैयासिक्यामादिपर्वणि मयदर्शनपर्वणि वरप्रदाने त्रयस्त्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्यायः ॥ २३३ ॥
इस प्रकार श्रीमहाभारतमें व्यासनिर्र्मित एक लाख श्लोकोंकी संहिताके अंतर्गत आदिपर्वके मयदर्शनपर्वमें इन्द्रवरदानविषयक दो सौ तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २३३ ॥
(आदिपर्व सम्पूर्णम्)
| अनुष्टुप् छन्द | (अन्य बड़े छन्द) | बड़े छन्दोंको ३२ अक्षरोंके अनुष्टुप्के अनुसार गिननेपर | गद्योंको अनुष्टुप् छन्द बनाकर जोड़नेपर | कुल | |
|---|---|---|---|---|---|
| उत्तरभारतीय पाठसे लिये गये श्लोक— | ७८७० ½ | (५११ ½) | ७३६ ½ | २८३ | ८८९० |
| दक्षिणभारतीय पाठसे लिये गये श्लोक— | ७१० ½ | (१८ ½) | २६ | X | ७३६ ½ |
आदिपर्वकी पूर्ण श्लोकसंख्या — ९६२६ ½