भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 1751

बता रहे हैं ।। ६ ।।

श्रीकृष्ण उवाच

कुलकार्यं महाबाहो कश्चिदेकः कुलोद्वहः । वहते यस्तन्नियोगाद् वयमभ्युद्यतास्त्वयि ।। ७ ।। श्रीकृष्णने कहा— महाबाहो! समूचे कुलमें कोई एक ही पुरुष कुलका भार सँभालता है। उस कुलके सभी लोगोंकी रक्षा आदिका कार्य सम्पन्न करता है। जो वैसे महापुरुष हैं, उन्हींकी आज्ञासे हमलोग आज तुम्हें दण्ड देनेको उद्यत हुए हैं ।। ७ ।। त्वया चोपहृता राजन् क्षत्रिया लोकवासिनः । तदागः क्रूरमुत्पाद्य मन्यसे किमनागसम् ।। ८ ।। राजन्! तुमने भूलोकनिवासी क्षत्रियोंको कैद कर लिया है। ऐसे क्रूर अपराधका आयोजन करके भी तुम अपनेको निरपराध कैसे मानते हो? ।। ८ ।। राजा राज्ञः कथं साधून् हिंस्यान्नृपतिसत्तम । तद् राज्ञः संनिगृह्य त्वं रुद्रायोपजिहीर्षसि ।। ९ ।। नृपश्रेष्ठ! एक राजा दूसरे श्रेष्ठ राजाओंकी हत्या कैसे कर सकता है? तुम राजाओंको कैद करके उन्हें रुद्रदेवताकी भेंट चढ़ाना चाहते हो? ।। ९ ।। अस्मांस्तदेनो गच्छेद्वि कृतं बार्हद्रथ त्वया । वयं हि शक्ता धर्मस्य रक्षणे धर्मचारिणः ।। १० ।। बृहद्रथकुमार! तुम्हारे द्वारा किया हुआ यह पाप हम सब लोगोंपर लागू होगा; क्योंकि हम धर्मकी रक्षा करनेमें समर्थ और धर्मका पालन करनेवाले हैं ।। १० ।। मनुष्याणां समालम्भो न च दृष्टः कदाचन । स कथं मानुषैर्देवं यष्टुमिच्छसि शंकरम् ।। ११ ।। किसी देवताकी पूजाके लिये मनुष्योंका वध कभी नहीं देखा गया। फिर तुम कल्याणकारी देवता भगवान् शिवकी पूजा मनुष्योंकी हिंसाद्वारा कैसे करना चाहते हो? ।। ११ ।। सवर्णो हि सवर्णानां पशुसंज्ञां करिष्यसि । कोऽन्य एवं यथा हि त्वं जरासंध वृथामतिः ।। १२ ।। जरासंध! तुम्हारी बुद्धि मारी गयी है, तुम भी उसी वर्णके हो, जिस वर्णके वे राजालोग हैं। क्या तुम अपने ही वर्णके लोगोंको पशुनाम देकर उनकी हत्या करोगे? तुम्हारे-जैसा क्रूर दूसरा कौन है? ।। १२ ।। यस्यां यस्यामवस्थायां यद् यत् कर्म करोति यः । तस्यां तस्यामवस्थायां तत् फलं समवाप्नुयात् ।। १३ ।।