महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1792, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंतं हेमकूटं राजेन्द्र समतिक्रम्य पाण्डवः ।।
हरिवर्षं विवेशाथ सैन्येन महताऽऽवृतः ।
तत्र पार्थो ददर्शाथ बहूनिह मनोरमान् ।।
नगरांश्च वनांश्चैव नदींश्च विमलोदकाः ।
तत्पश्चात् अर्जुनने हेमकूट पर्वतपर जाकर पड़ाव डाला। राजेन्द्र! फिर हेमकूटको भी लाँघकर वे पाण्डुनन्दन पार्थ अपनी विशाल सेनाके साथ हरिवर्षमें जा पहुँचे। वहाँ उन्होंने बहुत-से मनोरम नगर, सुन्दर वन तथा निर्मल जलसे भरी हुई नदियाँ देखीं।
पुरुषान् देवकल्पांश्च नारीश्च प्रियदर्शनाः ।।
तान् सर्वांस्तत्र दृष्ट्वाथ मुदा युक्तो धनंजयः ।
वहाँके पुरुष देवताओंके समान तेजस्वी थे। स्त्रियाँ भी परम सुन्दरी थीं। उन सबका अवलोकन करके अर्जुनको वहाँ बड़ी प्रसन्नता हुई।
वशे चक्रेऽथ रत्नानि लेभे च सुबहूनि च ।।
ततो निषधमासाद्य गिरिस्यानजयत् प्रभुः ।
अथ राजन्नतिक्रम्य निषधं शैलमायतम् ।।
विवेश मध्यं वर्षं पार्थो दिव्यमिलावृतम् ।
उन्होंने हरिवर्षको अपने अधीन कर लिया और वहाँसे बहुतेरे रत्न प्राप्त किये। इसके बाद निषधपर्वतपर जाकर शक्तिशाली अर्जुनने वहाँके निवासियोंको पराजित किया। तदनन्तर विशाल निषधपर्वतको लाँघकर वे दिव्य इलावृतवर्षमें पहुँचे, जो जम्बूद्वीपका मध्यवर्ती भूभाग है।
तत्र देवोपमान् दिव्यान् पुरुषान् देवदर्शनान् ।।
अदृष्टपूर्वान् सुभगान् स ददर्श धनंजयः ।
वहाँ अर्जुनने देवताओं-जैसे दिखायी देनेवाले देवोपम शक्तिशाली दिव्य पुरुष देखे। वे सब-के-सब अत्यन्त सौभाग्यशाली और अद्भुत थे। उससे पहले अर्जुनने कभी वैसे दिव्य पुरुष नहीं देखे थे।
सदनानि च शुभ्राणि नारीश्चाप्सरसन्निभाः ।।
दृष्ट्वा तानजयद् रम्यान् स तैश्च ददृशे तदा ।
वहाँके भवन अत्यन्त उज्ज्वल और भव्य थे तथा नारियाँ अप्सराओंके समान प्रतीत होती थीं। अर्जुनने वहाँके रमणीय स्त्री-पुरुषोंको देखा। इनपर भी वहाँके लोगोंकी दृष्टि पड़ी।
जित्वा च तान् महाभागान् करे च विनिवेश्य सः ।।
रत्नान्यादाय दिव्यानि भूषणैर्वसनैः सह ।
उदीचीमथ राजेन्द्र ययौ पार्थो मुदान्वितः ।।