भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 1879, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1879

प्रभावात् पद्मनाभस्य शाश्वती च कृता नृणाम् ।।

मरनेपर उन दोनोंकी लाशें जलमें डूबकर एक हो गयीं। जलकी लहरोंसे मथित होकर उन दोनों दैत्योंने जो मेद छोड़ा, उससे आच्छादित होकर वहाँका जल अदृश्य हो गया। उसीपर भगवान् नारायणने नाना प्रकारके जीवोंकी सृष्टि की। राजन् कुन्तीकुमार! उन दोनों दैत्योंके मेदसे सारी वसुधा आच्छादित हो गयी, अतः तभीसे यह मही 'मेदिनी' के नामसे प्रसिद्ध हुई। भगवान् पद्मनाभके प्रभावसे यह मनुष्योंके लिये शाश्वत आधार बन गयी।

(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)