भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

पृष्ठ 19, कुल 2256 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 19

शिक्षा

(खाण्डवदाहपर्व)

२२१- युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेषधारी अग्निदेवका आगमन २२२- अग्निदेवका खाण्डववनको जलानेके लिये श्रीकृष्ण और अर्जुनसे सहायताकी याचना करना, अग्निदेव उस वनको क्यों जलाना चाहते थे, इसे बतानेके प्रसंगमें राजा श्वेतकिकी कथा २२३- अर्जुनका अग्निकी प्रार्थना स्वीकार करके उनसे दिव्य धनुष एवं रथ आदि माँगना २२४- अग्निदेवका अर्जुन और श्रीकृष्णको दिव्य धनुष, अक्षय तरकस, दिव्य रथ और चक्र आदि प्रदान करना तथा उन दोनोंकी सहायतासे खाण्डववनको जलाना २२५- खाण्डववनमें जलते हुए प्राणियोंकी दुर्दशा और इन्द्रके द्वारा जल बरसाकर आग बुझानेकी चेष्टा २२६- देवताओं आदिके साथ श्रीकृष्ण और अर्जुनका युद्ध

(मयदर्शनपर्व)

२२७- देवताओंकी पराजय, खाण्डववनका विनाश और मयासुरकी रक्षा २२८- शार्ङ्गिकोपाख्यान—मन्दपाल मुनिके द्वारा जरिता-शार्ङ्गिकासे पुत्रोंकी उत्पत्ति और उन्हें बचानेके लिये मुनिका अग्निदेवकी स्तुति करना २२९- जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना २३०- जरिता और उसके बच्चोंका संवाद २३१- शार्ङ्गिकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना २३२- मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना २३३- इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुना तटपर बैठना

(आदिपर्व सम्पूर्ण)


सभापर्व

(सभाक्रियापर्व)