महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविदुर उवाच ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः शूद्रा येऽन्ये वदन्त्यथ । तच्छृणुष्व महाराज वक्ष्यते च मया तव ॥ **विदुर बोले—**महाराज! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र तथा अन्यलोग इस घटनाके सम्बन्धमें जो कुछ कहते हैं, वह सुनिये, मैं आपसे सब बातें बता रहा हूँ। हा हा गच्छन्ति नो नाथाः समवेक्षध्वमीदृशम् । इति पौराः सुदुःखार्ताः शोचन्ति स्म समन्ततः ॥ पाण्डवोंके जाते समय समस्त पुरवासी दुःखसे आतुर हो सब ओर शोकमें डूबे हुए थे और इस प्रकार कह रहे थे—‘हाय! हाय! हमारे स्वामी, हमारे रक्षक वनमें चले जा रहे हैं। भाइयो! देखो, धृतराष्ट्रके पुत्रोंका यह कैसा अन्याय है?’ तदहृष्टमिवाकूजं गतोत्सवमिवाभवत् । नगरं हास्तिनपुरं सस्त्रीवृद्धकुमारकम् ॥ स्त्री, बालक और वृद्धोंसहित सारा हस्तिनापुर नगर हर्षरहित, शब्दशून्य तथा उत्सवहीन-सा हो गया। सर्वे चासन् निरुत्साहा व्याधिना बाधिता यथा ॥ पार्थात् प्रति नरा नित्यं चिन्ताशोकपरायणाः । तत्र तत्र कथां चक्रुः समासाद्य परस्परम् ॥ सब लोग कुन्तीपुत्रोंके लिये निरन्तर चिन्ता एवं शोकमें निमग्न हो उत्साह खो बैठे थे। सबकी दशा रोगियोंके समान हो गयी थी। सब एक-दूसरेसे मिलकर जहाँ-तहाँ पाण्डवोंके विषयमें ही वार्तालाप करते थे। वनं गते धर्मराजे दुःखशोकपरायणाः । बभूवुः कौरवा वृद्धा भृशं शोकेन पीडिताः ॥ धर्मराजके वनमें चले जानेपर समस्त वृद्ध कौरव भी अत्यन्त शोकसे व्यथित हो दुःख और चिन्तामें निमग्न हो गये। ततः पौरजनः सर्वः शोचन्नास्ते जनाधिपम् । कुर्वाणाश्च कथास्तत्र ब्राह्मणाः पार्थिवं प्रति ॥ तदनन्तर समस्त पुरवासी राजा युधिष्ठिरके लिये शोकाकुल हो गये। उस समय वहाँ ब्राह्मणलोग राजा युधिष्ठिरके विषयमें निम्नांकित बातें करने लगे।
ब्राह्मणा ऊचुः कथं नु राजा धर्मात्मा वने वसति निर्जने । तस्यानुजाश्च ते नित्यं कृष्णा च द्रुपदात्मजा ॥ सुखार्हापि च दुःखार्ता कथं वसति सा वने ॥