महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रह्लादका शिष्य नग्नजित् राजा सुबलके रूपमें प्रकट हुआ। देवताओंके कोपसे उसकी संतति (शकुनि) धर्मका नाश करनेवाली हुई। गान्धारराज सुबलका पुत्र शकुनि एवं सौबल नामसे विख्यात हुआ तथा उनकी पुत्री गान्धारी दुर्योधनकी माता थी। ये दोनों भाई-बहिन अर्थशास्त्रके ज्ञानमें निपुण थे ॥ १११-११२ ॥
कृष्णद्वैपायनाज्जज्ञे धृतराष्ट्रो जनेश्वरः । क्षेत्रे विचित्रवीर्यस्य पाण्डुश्चैव महाबलः ॥ ११३ ॥ धर्मार्थकुशलो धीमान् मेधावी धूतकल्मषः । विदुरः शूद्रयोनौ तु जज्ञे द्वैपायनादपि ॥ ११४ ॥ पाण्डोस्तु जज्ञिरे पञ्च पुत्रा देवसमाः पृथक् । द्वयोः स्त्रियोर्गुणज्येष्ठस्तेषामासीद् युधिष्ठिरः ॥ ११५ ॥
राजा विचित्रवीर्यकी क्षेत्रभूता अम्बिका और अम्बालिकाके गर्भसे कृष्णद्वैपायन व्यासद्वारा राजा धृतराष्ट्र और महाबली पाण्डुका जन्म हुआ। द्वैपायन व्याससे ही शूद्रजातीय स्त्रीके गर्भसे विदुरजीका भी जन्म हुआ था। वे धर्म और अर्थके ज्ञानमें निपुण, बुद्धिमान्, मेधावी और निष्पाप थे। पाण्डुसे दो स्त्रियोंके द्वारा पृथक्-पृथक् पाँच पुत्र उत्पन्न हुए, जो सब-के-सब देवताओंके समान थे। उन सबमें बड़े युधिष्ठिर थे। वे उत्तम गुणोंमें भी सबसे बढ़-चढ़कर थे ॥ ११३—११५ ॥
धर्माद् युधिष्ठिरो जज्ञे मारुताच्च वृकोदरः । इन्द्राद् धनंजयः श्रीमान् सर्वशस्त्रभृतां वरः ॥ ११६ ॥ जज्ञाते रूपसम्पन्नावश्विभ्यां च यमावपि । नकुलः सहदेवश्च गुरुशुश्रूषणे रतौ ॥ ११७ ॥
युधिष्ठिर धर्मसे, भीमसेन वायुदेवतासे, सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ श्रीमान् अर्जुन इन्द्रदेवसे तथा सुन्दर रूपवाले नकुल और सहदेव अश्विनीकुमारोंसे उत्पन्न हुए थे। वे जुड़वें पैदा हुए थे। नकुल और सहदेव सदा गुरुजनोंकी सेवामें तत्पर रहते थे ॥ ११६-११७ ॥
तथा पुत्रशतं जज्ञे धृतराष्ट्रस्य धीमतः । दुर्योधनप्रभृतयो युयुत्सुः करणस्तथा ॥ ११८ ॥
परम बुद्धिमान् राजा धृतराष्ट्रके दुर्योधन आदि सौ पुत्र हुए। इनके अतिरिक्त युयुत्सु भी उन्हींका पुत्र था। वह वैश्यजातीय मातासे उत्पन्न होनेके कारण 'करण*' कहलाता था ॥ ११८ ॥
ततो दुःशासनश्चैव दुःसहश्चापि भारत । दुर्मर्षणो विकर्णश्च चित्रसेनो विविंशतिः ॥ ११९ ॥ जयः सत्यव्रतश्चैव पुरुमित्रश्च भारत । वैश्यापुत्रो युयुत्सुश्च एकादश महारथाः ॥ १२० ॥