भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 460

अदितिके पुत्र बारह आदित्य हुए, जो लोकेश्वर हैं। भरतवंशी नरेश! उन सबके नाम तुम्हें बता रहा हूँ— ।। १४ ।। धाता मित्रोऽर्यमा शक्रो वरुणस्त्वंश एव च । भगो विवस्वान् पूषा च सविता दशमस्तथा ॥ १५ ॥ एकादशस्तथा त्वष्टा द्वादशो विष्णुरुच्यते । जघन्यजस्तु सर्वेषामादित्यानां गुणाधिकः ॥ १६ ॥ धाता, मित्र, अर्यमा, इन्द्र, वरुण, अंश, भग, विवस्वान्, पूषा, दसवें सविता, ग्यारहवें त्वष्टा और बारहवें विष्णु कहे जाते हैं। इन सब आदित्योंमें विष्णु छोटे हैं; किंतु गुणोंमें वे सबसे बढ़कर हैं ।। १५-१६ ।। एक एव दितेः पुत्रो हिरण्यकशिपुः स्मृतः । नाम्ना ख्यातास्तु तस्येमे पञ्च पुत्रा महात्मनः ॥ १७ ॥ दितिका एक ही पुत्र हिरण्यकशिपु अपने नामसे विख्यात हुआ। उस महामना दैत्यके पाँच पुत्र थे ।। १७ ।। प्रह्लादः पूर्वजस्तेषां संह्रादस्तदनन्तरम् । अनुह्रादस्तृतीयोऽभूत् तस्माच्च शिबिबाष्कलौ ॥ १८ ॥ उन पाँचोंमें प्रथमका नाम प्रह्लाद है। उससे छोटेको संह्राद कहते हैं। तीसरेका नाम अनुह्राद है। उसके बाद चौथे शिबि और पाँचवें बाष्कल हैं ।। १८ ।। प्रह्लादस्य त्रयः पुत्राः ख्याताः सर्वत्र भारत । विरोचनश्च कुम्भश्च निकुम्भश्चेति भारत ॥ १९ ॥ भारत! प्रह्लादके तीन पुत्र हुए, जो सर्वत्र विख्यात हैं। उनके नाम ये हैं—विरोचन, कुम्भ और निकुम्भ ।। १९ ।। विरोचनस्य पुत्रोऽभूद् बलिरेकः प्रतापवान् । बलेश्च प्रथितः पुत्रो बाणो नाम महासुरः ॥ २० ॥ विरोचनके एक ही पुत्र हुआ, जो महाप्रतापी बलिके नामसे प्रसिद्ध है। बलिका विश्वविख्यात पुत्र बाण नामक महान् असुर है ।। २० ।। रुद्रस्यानुचरः श्रीमान् महाकालेति यं विदुः । चतुस्त्रिंशद् दनोः पुत्राः ख्याताः सर्वत्र भारत ॥ २१ ॥ जिसे सब लोग भगवान् शंकरके पार्षद श्रीमान् महाकालके नामसे जानते हैं। भारत! दनुके चौंतीस पुत्र हुए, जो सर्वत्र विख्यात हैं ।। २१ ।। तेषां प्रथमजो राजा विप्रचित्तिर्महायशाः । शम्बरो नमुचिश्चैव पुलोमा चेति विश्रुतः ॥ २२ ॥ असिलोमा च केशी च दुर्जयश्चैव दानवः । अयःशिरा अश्वशिरा अश्वशंकुश्च वीर्यवान् ॥ २३ ॥