भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 596

इत्येवमुक्तो नृपतिराह क्षत्रकुलोद्भवः । त्वं भद्रे ब्राह्मणी तस्मान्मया नार्हसि सङ्गमम् ॥ सर्वलोकगुरुः काव्यस्त्वं तस्य दुहितासि वै । तस्मादपि भयं मेऽद्य तस्मात् कल्याणि नार्हसि ॥ **वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! तदनन्तर नहुषपुत्र राजा ययातिने देवयानीको ब्राह्मणकन्या जानकर उसका दाहिना हाथ अपने हाथमें ले उसे उस कुएँसे बाहर निकाला। वेगपूर्वक कुएँसे बाहर करके राजा ययाति उससे बोले—'भद्रे! अब जहाँ इच्छा हो जाओ। तुम्हें कोई भय नहीं है।' राजा ययातिके ऐसा कहनेपर देवयानीने उन्हें उत्तर देते हुए कहा—'तुम मुझे शीघ्र अपने साथ ले चलो; क्योंकि तुम मेरे प्रियतम हो। तुमने मेरा हाथ पकड़ा है, अतः तुम्हीं मेरे पति होओगे।' देवयानीके ऐसा कहनेपर राजा बोले—'भद्रे! मैं क्षत्रियकुलमें उत्पन्न हुआ हूँ और तुम ब्राह्मणकन्या हो। अतः मेरे साथ तुम्हारा समागम नहीं होना चाहिये। कल्याणी! भगवान् शुक्राचार्य सम्पूर्ण जगत्‌के गुरु हैं और तुम उनकी पुत्री हो, अतः मुझे उनसे भी डर लगता है। तुम मुझ-जैसे तुच्छ पुरुषके योग्य कदापि नहीं हो'।

देवयान्युवाच

यदि मद्धचनादद्य मां नेच्छसि नराधिप । त्वामेव वरये पित्रा पश्चाज्ज्ञास्यसि गच्छसि ॥) **देवयानी बोली—**नरेश्वर! यदि तुम मेरे कहनेसे आज मुझे साथ ले जाना नहीं चाहते, तो मैं पिताजीके द्वारा भी तुम्हारा ही वरण करूँगी। फिर तुम मुझे अपने योग्य मानोगे और साथ ले चलोगे।

आमन्त्रयित्वा सुश्रोणीं ययातिः स्वपुरं ययौ । गते तु नाहुषे तस्मिन् देवयान्यप्यनिन्दिता ॥ २४ ॥ (क्वचिदार्ता च रुदती वृक्षमाश्रित्य तिष्ठति । ततश्चिरायमाणायां दुहितर्याह भार्गवः ॥ धात्रि त्वमानय क्षिप्रं देवयानीं शुचिस्मिताम् । इत्युक्तमात्रे सा धात्री त्वरिताऽऽह्वयितुं गता ॥ यत्र यत्र सखीभिः सा गता पदममार्गत । सा ददर्श तथा दीनां श्रमार्तां रुदतीं स्थिताम् ॥ (वैशम्पायनजी कहते हैं—) तदनन्तर सुन्दरी देवयानीकी अनुमति लेकर राजा ययाति अपने नगरको चले गये। नहुषनन्दन ययातिके चले जानेपर सती-साध्वी देवयानी आर्त-भावसे रोती हुई कहीं किसी वृक्षका सहारा लेकर खड़ी रही। जब पुत्रीके घर लौटनेमें विलम्ब हुआ, तब शुक्राचार्यने धायसे कहा—'धाय! तू पवित्र हास्यवाली मेरी बेटी देवयानीको शीघ्र यहाँ बुला ला।' उनके इतना कहते ही धाय तुरंत उसे बुलाने चली गयी।