महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 627, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंरुदन्तस्तेऽथ शर्मिष्ठामभ्ययुर्बालकास्ततः । श्रुत्वा तु तेषां बालानां सव्रीड इव पार्थिवः ॥ १७ ॥ तब वे बालक रोते हुए शर्मिष्ठाके पास चले गये। उनकी बातें सुनकर राजा ययाति लज्जित-से हो गये ॥ १७ ॥
दृष्ट्वा तु तेषां बालानां प्रणयं पार्थिवं प्रति । बुद्ध्वा च तत्त्वं सा देवी शर्मिष्ठामिदमब्रवीत् ॥ १८ ॥ उन बालकोंका राजाके प्रति विशेष प्रेम देखकर देवयानी सारा रहस्य समझ गयी और शर्मिष्ठासे इस प्रकार बोली ॥ १८ ॥
देवयान्युवाच
(अभ्यागच्छति मां कश्चिदृषिरित्येवमब्रवीः । ययातिमेव नूनं त्वं प्रोत्साहयसि भामिनि ॥ पूर्वमेव मया प्रोक्तं त्वया तु वृजिनं कृतम् ।) मदधीना सती कस्मादकार्षीर्विप्रियं मम । तमेवासुरधर्मं त्वमास्थिता न बिभेषि मे ॥ १९ ॥ **देवयानी बोली—**भामिनि! तुम तो कहती थीं कि मेरे पास कोई ऋषि आया करते हैं। यह बहाना लेकर तुम राजा ययातिको ही अपने पास आनेके लिये प्रोत्साहन देती रहीं। मैंने