भारतकोश
महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व

Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,256 पृष्ठ

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पृष्ठ 694

आजहार यशो दीप्तं जिगाय च वसुन्धराम् ॥ १५ ॥ इनमें महापराक्रमी तंसुने पौरव वंशका भार वहन करते हुए उज्ज्वल यशका उपार्जन किया और सारी पृथ्वीको जीत लिया ॥ १५ ॥ ईलिनं तु सुतं तंसुर्जनयामास वीर्यवान् । सोऽपि कृत्स्नामिमां भूमिं विजिग्ये जयतां वरः ॥ १६ ॥ पराक्रमी तंसुने ईलिन नामक पुत्र उत्पन्न किया, जो विजयी पुरुषोंमें श्रेष्ठ था। उसने भी सारी पृथ्वी जीत ली थी ॥ १६ ॥ रथन्त्यां सुतान् पञ्च पञ्चभूतोपमांस्ततः । ईलिनो जनयामास दुष्मन्तप्रभृतीन् नृपान् ॥ १७ ॥ ईलिनने रथन्तरी नामवाली अपनी पत्नीके गर्भसे पंच महाभूतोंके समान दुष्मन्त आदि पाँच राजपुत्रोंको पुत्ररूपमें उत्पन्न किया ॥ १७ ॥ दुष्मन्तं शूरभीमौ च प्रवसुं वसुमेव च । तेषां श्रेष्ठोऽभवद् राजा दुष्मन्तो जनमेजय ॥ १८ ॥ (उनके नाम ये हैं—) दुष्मन्त, शूर, भीम, प्रवसु तथा वसु। जनमेजय! इनमें सबसे बड़े होनेके कारण दुष्मन्त राजा हुए ॥ १८ ॥ दुष्मन्ताद् भरतो जज्ञे विद्वाञ्छाकुन्तलो नृपः । तस्माद् भरतवंशस्य विप्रतस्थे महद् यशः ॥ १९ ॥ दुष्मन्तसे विद्वान् राजा भरतका जन्म हुआ, जो शकुन्तलाके पुत्र थे। उन्हींसे भरतवंशका महान् यश फैला ॥ १९ ॥ भरतस्तिसृषु स्त्रीषु नव पुत्रानजीजनत् । नाभ्यनन्दत तान् राजा नानुरूपा ममेत्युत ॥ २० ॥ भरतने अपनी तीन रानियोंसे नौ पुत्र उत्पन्न किये। किंतु ‘ये मेरे अनुरूप नहीं हैं’ ऐसा कहकर राजाने उन शिशुओंका अभिनन्दन नहीं किया ॥ २० ॥ ततस्तान् मातरः क्रुद्धाः पुत्रान् निन्युर्यमक्षयम् । ततस्तस्य नरेन्द्रस्य वितथं पुत्रजन्म तत् ॥ २१ ॥ तब उन शिशुओंकी माताओंने कुपित होकर उनको मार डाला। इससे महाराज भरतका वह पुत्रोत्पादन व्यर्थ हो गया ॥ २१ ॥ ततो महद्भिः क्रतुभिरीजानो भरतस्तदा । लेभे पुत्रं भरद्वाजाद् भुमन्युं नाम भारत ॥ २२ ॥ भारत! तब महाराज भरतने बड़े-बड़े यज्ञोंका अनुष्ठान किया और महर्षि भरद्वाजकी कृपासे एक पुत्र प्राप्त किया, जिसका नाम भुमन्यु था ॥ २२ ॥ ततः पुत्रिणमात्मानं ज्ञात्वा पौरवनन्दनः । भुमन्युं भरतश्रेष्ठ यौवराज्येऽभ्यषेचयत् ॥ २३ ॥