महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस जज्ञे विदुरो नाम कृष्णद्वैपायनात्मजः । धृतराष्ट्रस्य वै भ्राता पाण्डोश्चैव महात्मनः ॥ २८ ॥ वही बालक विदुर हुआ, जो श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासका पुत्र था। एक पिताका होनेके कारण वह राजा धृतराष्ट्र और महात्मा पाण्डुका भाई था ॥ २८ ॥
धर्मो विदुररूपेण शापात् तस्य महात्मनः । माण्डव्यस्यार्थतत्त्वज्ञः कामक्रोधविवर्जितः ॥ २९ ॥ महात्मा माण्डव्यके शापसे साक्षात् धर्मराज ही विदुररूपमें उत्पन्न हुए थे। वे अर्थतत्त्वके ज्ञाता और काम-क्रोधसे रहित थे ॥ २९ ॥
कृष्णद्वैपायनोऽप्येतत् सत्यवत्यै न्यवेदयत् । प्रलम्भमात्मनश्चैव शूद्रायाः पुत्रजन्म च ॥ ३० ॥ श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासने सत्यवतीको भी सब बातें बता दीं। उन्होंने यह रहस्य प्रकट कर दिया कि अम्बिकाने अपनी दासीको भेजकर मेरे साथ छल किया है, अतः शूद्रा दासीके गर्भसे ही पुत्र उत्पन्न होगा ॥ ३० ॥
स धर्मस्यानृणो भूत्वा पुनर्मात्रा समेत्य च । तस्यै गर्भं समावेद्य तत्रैवान्तरधीयत ॥ ३१ ॥