महाभारत (खंड १) - आदि व सभा पर्व
Mahabharata (Vol 1) - Adi and Sabha Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 87, कुल 2256 में से
संदर्भ में पढ़ेंउग्रश्रवाजीने कहा—एक रथ, एक हाथी, पाँच पैदल सैनिक और तीन घोड़े—बस, इन्हीँको सेनाके मर्मज्ञ विद्वानोंने 'पत्ति' कहा है ॥ १९ ॥ पत्तिं तु त्रिगुणामेतामाहुः सेनामुखं बुधाः । त्रीणि सेनामुखान्येको गुल्म इत्यभिधीयते ॥ २० ॥ इसी पत्तिकी तिगुनी संख्याको विद्वान् पुरुष 'सेनामुख' कहते हैं। तीन 'सेनामुखों' को एक 'गुल्म' कहा जाता है ॥ २० ॥ त्रयो गुल्मा गणो नाम वाहिनी तु गणास्त्रयः । स्मृतास्तिस्रस्तु वाहिन्यः पृतनेति विचक्षणैः ॥ २१ ॥ तीन गुल्मका एक 'गण' होता है, तीन गणकी एक 'वाहिनी' होती है और तीन वाहिनियोंको सेनाका रहस्य जाननेवाले विद्वानोंने 'पृतना' कहा है ॥ २१ ॥ चमूस्तु पृतनास्तिस्रस्तिस्रश्चम्बस्त्वनीकिनी । अनीकिनीं दशगुणां प्राहुरक्षौहिणीं बुधाः ॥ २२ ॥ तीन पृतनाकी एक 'चमू', तीन चमूकी एक 'अनीकिनी' और दस अनीकिनीकी एक 'अक्षौहिणी' होती है। यह विद्वानोंका कथन है ॥ २२ ॥ अक्षौहिण्याः प्रसंख्याता रथानां द्विजसत्तमाः । संख्या गणिततत्त्वज्ञैः सहस्राण्येकविंशतिः ॥ २३ ॥ शतान्युपरि चैवाष्टौ तथा भूयश्च सप्ततिः । गजानां च परीमाणमेतदेव विनिर्दिशेत् ॥ २४ ॥ श्रेष्ठ ब्राह्मणो! गणितके तत्त्वज्ञ विद्वानोंने एक अक्षौहिणी सेनामें रथोंकी संख्या इक्कीस हजार आठ सौ सत्तर (२१,८७०) बतलायी है। हाथियोंकी संख्या भी इतनी ही कहनी चाहिये ॥ २३-२४ ॥ ज्ञेयं शतसहस्रं तु सहस्राणि नवैव तु । नराणामपि पञ्चाशच्छतानि त्रीणि चानघाः ॥ २५ ॥ निष्पाप ब्राह्मणो! एक अक्षौहिणीमें पैदल मनुष्योंकी संख्या एक लाख नौ हजार तीन सौ पचास (१,०९,३५०) जाननी चाहिये ॥ २५ ॥ पञ्चषष्टिसहस्राणि तथाश्वानां शतानि च । दशोत्तराणि षट् प्राहुर्यथावदिह संख्यया ॥ २६ ॥ एक अक्षौहिणी सेनामें, घोड़ोंकी ठीक-ठीक संख्या पैंसठ हजार छः सौ दस (६५,६१०) कही गयी है ॥ २६ ॥ एतामक्षौहिणीं प्राहुः संख्यातत्त्वविदो जनाः । यां वः कथितवानस्मि विस्तरेण तपोधनाः ॥ २७ ॥ तपोधनो! संख्याका तत्त्व जाननेवाले विद्वानोंने इसीको अक्षौहिणी कहा है, जिसे मैंने आपलोगोंको विस्तारपूर्वक बताया है ॥ २७ ॥