महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1026, कुल 2580 में से
संदर्भ में पढ़ेंतदा भवन्ति लोकस्य मर्यादाः सुव्यवस्थिताः ॥ ३९ ॥ जब राजा निग्रह और अनुग्रहके द्वारा प्रजावर्गके साथ यथोचित बर्ताव करता है, तभी लोककी सम्पूर्ण मर्यादाएँ सुरक्षित होती हैं ॥ ३९ ॥ तस्माद् देशे च दुर्गे च शत्रुमित्रबलेषु च । नित्यं चारेण बोद्धव्यं स्थानं वृद्धिः क्षयस्तथा ॥ ४० ॥ इसलिये राजाको उचित है कि वह देश और दुर्गमें अपने शत्रु और मित्रोंके सैनिकोंकी स्थिति, वृद्धि और क्षयका गुप्तचरोंद्वारा सदा पता लगाता रहे ॥ ४० ॥ राज्ञामुपायश्चारश्च बुद्धिमन्त्रपराक्रमाः । निग्रहप्रग्रहौ चैव दाक्ष्यं वै कार्यसाधकम् ॥ ४१ ॥ साम, दान, दण्ड, भेद—ये चार उपाय, गुप्तचर, उत्तम बुद्धि, सुरक्षित मन्त्रणा, पराक्रम, निग्रह, अनुग्रह और चतुरता—ये राजाओंके लिये कार्य-सिद्धिके साधन हैं ॥ साम्ना दानेन भेदेन दण्डेनोपेक्षणेन च । साधनीयानि कर्माणि समासव्यासयोगतः ॥ ४२ ॥ साम, दान, भेद, दण्ड और उपेक्षा—इन नीतियोंमेंसे एक-दोके द्वारा या सबके एक साथ प्रयोगद्वारा राजाओंको अपने कार्य सिद्ध करने चाहिये ॥ ४२ ॥ मन्त्रमूला नयाः सर्वे चाराश्च भरतर्षभ । सुमन्त्रितेन या सिद्धिस्तां द्विजैः सह मन्त्रयेत् ॥ ४३ ॥ भरतश्रेष्ठ! सारी नीतियों और गुप्तचरोंका मूल आधार है मन्त्रणाको गुप्त रखना। उत्तम मन्त्रणा या विचारसे जो सिद्धि प्राप्त होती है, उसके लिये द्विजोंने साथ गुप्त परामर्श करना चाहिये ॥ ४३ ॥ स्त्रिया मूढेन बालेन लुब्धेन लघुनापि वा । न मन्त्रयीत गुह्यानि येषु चोन्मादलक्षणम् ॥ ४४ ॥ स्त्री, मूर्ख, बालक, लोभी और नीच पुरुषोंके साथ तथा जिसमें उन्मादका लक्षण दिखायी दे, उसके साथ भी गुप्त परामर्श न करे ॥ ४४ ॥ मन्त्रयेत् सह विद्वद्भिः शक्तैः कर्माणि कारयेत् । स्निग्धैश्च नीतिविन्यासान् मूर्खान् सर्वत्र वर्जयेत् ॥ ४५ ॥ विद्वानोंके साथ ही गुप्त मन्त्रणा करनी चाहिये। जो शक्तिशाली हों, उन्हींसे कार्य कराने चाहिये। जो स्नेही (सुहृद्) हों उन्हींके द्वारा नीतिके प्रयोगका काम कराना चाहिये। मूर्खोंको तो सभी कार्योंसे अलग रखना चाहिये ॥ ४५ ॥ धार्मिकान् धर्मकार्येषु अर्थकार्येषु पण्डितान् । स्त्रीषु क्लीबान् नियुञ्जीत क्रूरान् क्रूरेषु कर्मसु ॥ ४६ ॥ राजाको चाहिये कि वह धर्मके कार्योंमें धार्मिक पुरुषोंको, अर्थसम्बन्धी कार्योंमें अर्थशास्त्रके पण्डितोंको, स्त्रियोंकी देख-भालके लिये नपुंसकोंको और कठोर कार्योंमें क्रूर