भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 1137, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 1137

‘अपनेसे अल्पशक्तिवाले विपक्षी पर यदि इसका प्रहार किया जाय तो यह सम्पूर्ण विश्वको दग्ध कर देगा। धनंजय! जब शत्रुके द्वारा अपनेको बहुत पीड़ा प्राप्त होने लगे, उस दशामें आत्मरक्षाके लिये इसका प्रयोग करना चाहिये। शत्रुके अस्त्रोंका विनाश करनेके लिये सर्वथा इसका प्रयोग उचित है’ ।। ५३ १/२ ।।

तदप्रतिहतं दिव्यं सर्वास्त्रप्रतिषेधनम् ।। ५४ ।।
मूर्तिमन्मे स्थितं पार्श्वे प्रसन्ने गोवृषध्वजे ।
इस प्रकार भगवान् वृषभध्वजके प्रसन्न होनेपर सम्पूर्ण अस्त्रोंका निवारण करनेवाला और कहीं भी कुण्ठित न होनेवाला दिव्य पाशुपतास्त्र मूर्तिमान् हो मेरे पास आकर खड़ा हो गया ।। ५४ १/२ ।।

उत्सादनममित्राणां परसेनानिकर्तनम् ।। ५५ ।।
दुरासदं दुष्प्रसहं सुरदानवराक्षसैः ।
अनुज्ञातस्त्वहं तेन तत्रैव समुपाविशम् ।। ५६ ।।
प्रेक्षतश्चैव मे देवस्तत्रैवान्तरधीयत ।। ५७ ।।
वह शत्रुओंका संहारक और विपक्षियोंकी सेनाका विध्वंसक है। उसकी प्राप्ति बहुत कठिन है। देवता, दानव तथा राक्षस किसीके लिये भी उसका वेग सहन करना अत्यन्त कठिन है। फिर भगवान् शिवकी आज्ञा होनेपर मैं वहीं बैठ गया और वे मेरे देखते-देखते अन्तर्धान हो गये ।। ५५—५७ ।।

इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि निवातकवचयुद्धपर्वणि गन्धमादनवासे युधिष्ठिरार्जुनसंवादे सप्तषष्ट्यधिकशततमोऽध्यायः ।। १६७ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत निवातकवचयुद्धपर्वमें गन्धमादननिवासकालिक युधिष्ठिर-अर्जुन-संवादविषयक एक सौ सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। १६७ ।।


१. आचार्य नीलकण्ठके मतसे स्थूणाकर्ण नाम है शंकुकर्णका, जो भगवान् रुद्रके एक अवतार हैं। वे जिस अस्त्रके देवता हैं, उसका नाम भी स्थूणाकर्ण है।
२. मूलमें जाल शब्द आया है, जिसका अर्थ है, जालसम्बन्धी। यह जलवर्षक अस्त्रकी ही वारुणास्त्र है।
३. जैसे बादल पानीकी वर्षा करता है, उसी प्रकार निरन्तर बाणवर्षा करनेवाला अस्त्र शरवर्ष कहलाता है।
४. जैसे असंख्य टिड्डियाँ आकाशमें मँडराती और पौधोंपर टूट पड़ती हैं, उसी प्रकार जिस अस्त्रसे असंख्य बाण आकाशको आच्छादित करते और शत्रुको अपना लक्ष्य बनाते हैं, उसीका नाम शलभास्त्र है।
५. पत्थरोंकी वर्षा करनेवाले अस्त्रको अश्मवर्ष कहते हैं।

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