भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 1286, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 1286

नरश्रेष्ठ! एक हजार चतुर्युग बीतनेपर ब्रह्माजीका एक दिन होता है। यह सारा जगत् ब्रह्माके दिनभर ही रहता है (और वह दिन समाप्त होते ही नष्ट हो जाता है।) इसीको विद्वान् पुरुष लोकोंका प्रलय मानते हैं ।। २८ १/२ ।। अल्पावशिष्टे तु तदा युगान्ते भरतर्षभ ।। २९ ।। सहस्रान्ते नराः सर्वे प्रायशोऽनृतवादिनः । यज्ञप्रतिनिधिः पार्थ दानप्रतिनिधिस्तथा ।। ३० ।। व्रतप्रतिनिधिश्चैव तस्मिन् काले प्रवर्तते । भरतश्रेष्ठ! सहस्र युगकी समाप्तिमें जब थोड़ा-सा ही समय शेष रह जाता है, उस समय कलियुगके अन्तिम भागमें प्रायः सभी मनुष्य मिथ्यावादी हो जाते हैं। पार्थ! उस समय यज्ञ, दान और व्रतके प्रतिनिधि कर्म चालू हो जाते हैं अर्थात् यज्ञ, दान, तप मुख्य विधिसे न होकर गौण विधिसे नाममात्र होने लगते हैं ।। २९-३० १/२ ।। ब्राह्मणाः शूद्रकर्माणस्तथा शूद्रा धनार्जकाः ।। ३१ ।। क्षत्रधर्मेण वाप्यत्र वर्तयन्ति गते युगे । युगकी समाप्तिके समय ब्राह्मण शूद्रोंके कर्म करते हैं और शूद्र वैश्योंकी भाँति धनोपार्जन करने लगते हैं अथवा क्षत्रियोंके कर्मसे जीविका चलाने लगते हैं ।। ३१ १/२ ।। निवृत्तयज्ञस्वाध्याया दण्डाजिनविवर्जिताः ।। ३२ ।। ब्राह्मणाः सर्वभक्षाश्च भविष्यन्ति कलौ युगे । अजपा ब्राह्मणास्तात शूद्रा जपपरायणाः ।। ३३ ।। (सहस्र चतुर्युगके अन्तिम) कलियुगके अन्तिम भागमें ब्राह्मण यज्ञ, स्वाध्याय, दण्ड और मृगचर्मका त्याग कर देंगे और (भक्ष्याभक्ष्यका विचार छोड़कर) सब कुछ खाने-पीनेवाले हो जायेंगे। तात! ब्राह्मण तो जपसे दूर भागेंगे और शूद्र वैदिक मन्त्रोंके जपमें संलग्न होंगे ।। ३२-३३ ।। विपरीते तदा लोके पूर्वरूपं क्षयस्य तत् । बहवो म्लेच्छराजानः पृथिव्यां मनुजाधिप ।। ३४ ।। नरेश्वर! इस प्रकार जब लोगोंके विचार और व्यवहार विपरीत हो जाते हैं, तब प्रलयका पूर्वरूप आरम्भ हो जाता है। उस समय इस पृथ्वीपर बहुत-से म्लेच्छ राजा राज्य करने लगते हैं ।। ३४ ।। मृषानुशासिनः पापा मृषावादपरायणाः । आन्ध्राः शकाः पुलिन्दाश्च यवनाश्च नराधिपाः ।। ३५ ।। काम्बोजा बाह्निकाः शूरास्तथाऽऽभीरा नरोत्तम । न तदा ब्राह्मणः कश्चित् स्वधर्ममुपजीवति ।। ३६ ।। छलसे शासन करनेवाले, पापी और असत्यवादी आन्ध्र, शक, पुलिन्द, यवन, काम्बोज, बाह्लीक तथा शौर्यसम्पन्न आभीर इस देशके राजा होंगे। नरश्रेष्ठ! उस समय कोई

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