महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1616, कुल 2580 में से
संदर्भ में पढ़ें‘द्रुपदकुमारी! तुम शीघ्र ही देखोगी कि धृतराष्ट्रके पुत्रोंको मारकर और पहलेके वैरका भरपूर बदला चुकाकर तुम्हारे पतियोंने विजय पायी है और इस पृथ्वीपर महाराज युधिष्ठिरका अधिकार हो गया है।। ७।। यास्ताः प्रव्रजमानां त्वां प्राहसन् दर्पमोहिताः । ताः क्षिप्रं हतसंकल्पा द्रक्ष्यसि त्वं कुरुस्त्रियः ।। ८ ।। ‘तुम्हारे वन जाते समय अभिमानसे मोहित हो कुरुकुलकी जिन स्त्रियोंने तुम्हारी हँसी उड़ायी थी, उनकी आशाओंपर पानी फिर जायगा और तुम उन्हें शीघ्र ही दुरवस्थामें पड़ी हुई देखोगी ।। ८ ।। तव दुःखोपपन्नाया यैराचरितमप्रियम् । विद्धि सम्प्रस्थितान् सर्वान्स्तान् कृष्णे यमसादनम् ।। ९ ।। ‘कृष्णे! तुम दुःखमें पड़ी हुई थी, उस दशामें जिन लोगोंने तुम्हारा अप्रिय किया है, उन सबको तुम यमलोकमें गया हुआ ही समझो ।। ९ ।। पुत्रस्ते प्रतिविन्ध्यश्च सुतसोमस्तथाविधः । श्रुतकर्मार्जुनिश्चैव शतानीकश्च नाकुलिः ।। १० ।। सहदेवाच्च यो जातः श्रुतसेनस्तवात्मजः । सर्वे कुशलिनो वीराः कृतास्त्राश्च सुतास्तव ।। ११ ।। ‘युधिष्ठिरकुमार प्रतिविन्ध्य, भीमसेननन्दन सुतसोम, अर्जुनकुमार श्रुतकर्मा, नकुलनन्दन शतानीक तथा सहदेवकुमार श्रुतसेन—तुम्हारे ये सभी वीर पुत्र शस्त्रविद्यामें निपुण हो गये हैं और कुशलपूर्वक द्वारकापुरीमें रहते हैं ।। १०-११ ।। अभिमन्युरिव प्रीता द्वारवत्यां रता भृशम् । त्वमिवैषां सुभद्रा च प्रीत्या सर्वात्मना स्थिता ।। १२ ।। ‘वे सबके सब अभिमन्युकी भाँति बड़ी प्रसन्नताके साथ वहाँ रहते हैं। द्वारकामें उनका मन बहुत लगता है। सुभद्रादेवी तुम्हारी ही तरह उन सबके साथ सब प्रकारसे प्रेमपूर्ण बर्ताव करती हैं ।। १२ ।। प्रीयते तव निर्द्वन्द्वा तेभ्यश्च विगतज्वरा । दुःखिता तेन दुःखेन सुखेन सुखिता तथा ।। १३ ।। ‘वे किसीके प्रति भेदभाव न रखकर उन सबके प्रति निश्छल स्नेह रखती हैं। वे उन बालकोंके दुःखसे ही दुःखी और उन्हींके सुखसे सुखी होती हैं ।। १३ ।। भजेत् सर्वात्मना चैव प्रद्युम्नजननी तथा । भानुप्रभृतिभिश्चैनान् विशिनष्टि च केशवः ।। १४ ।। ‘प्रद्युम्नकी माताजी भी उनकी सब प्रकारसे सेवा और देखभाल करती हैं। श्यामसुन्दर अपने भानु आदि पुत्रोंसे भी बढ़कर तुम्हारे पुत्रोंको मानते हैं ।। १४ ।। भोजनाच्छादने चैषां नित्यं मे श्वशुरः स्थितः ।