भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 2054, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 2054

**वैशम्पायनजी कहते हैं—**नृपश्रेष्ठ! कुन्ती शापसे अत्यन्त डरकर मन-ही-मन तरह-तरहकी बातें सोच रही थी। उसके सारे अंग मोहसे व्याप्त हो रहे थे। वह बार-बार आश्चर्यचकित हो रही थी। एक ओर तो वह शापसे आतंकित थी, दूसरी ओर उसे भाई-बन्धुओंका भय लगा हुआ था। भूपाल! उस दशामें वह लज्जाके कारण विशृंखल वाणीद्वारा सूर्यदेवसे इस प्रकार बोली ।।

कुन्त्युवाच पिता मे ध्रियते देव माता चान्ये च बान्धवाः । न तेषु ध्रियमाणेषु विधिलोपो भवेदियम् ।। ८ ।। **कुन्तीने कहा—**देव! मेरे पिता, माता तथा अन्य बान्धव जीवित हैं। उन सबके जीते-जी स्वयं आत्मदान करनेपर कहीं शास्त्रीय विधिका लोप न हो जाय? ।। ८ ।। त्वया तु संगमो देव यदि स्याद् विधिवर्जितः । मन्निमित्तं कुलस्यास्य लोके कीर्तिर्नशेत् ततः ।। ९ ।। भगवन्! यदि आपके साथ मेरा वेदोक्त विधिके विपरीत समागम हो तो मेरे ही कारण जगत्‌में इस कुलकी कीर्ति नष्ट हो जायगी ।। ९ ।। अथवा धर्ममेतं त्वं मन्यसे तपतां वर । ऋते प्रदानाद् बन्धुभ्यस्तव कामं करोम्यहम् ।। १० ।। अथवा तपनेवालोंमें श्रेष्ठ दिवाकर! यदि बन्धुजनोंके दिये बिना ही मेरे साथ अपने समागमको आप धर्मयुक्त समझते हों तो मैं आपकी इच्छा पूर्ण कर सकती हूँ ।। १० ।। आत्मप्रदानं दुर्धर्ष तव कृत्वा सती त्वहम् । त्वयि धर्मो यशश्चैव कीर्तिरायुश्च देहिनाम् ।। ११ ।। दुर्धर्ष देव! क्या मैं आपको आत्मदान करके भी सती-साध्वी रह सकती हूँ? आपमें ही देहधारियोंके धर्म, यश, कीर्ति तथा आयु प्रतिष्ठित हैं ।। ११ ।।

सूर्य उवाच न ते पिता न ते माता गुरवो वा शुचिस्मिते । प्रभवन्ति वरारोहे भद्रं ते शृणु मे वचः ।। १२ ।। **भगवान् सूर्यने कहा—**शुचिस्मिते! वरारोहे! तुम्हारा कल्याण हो। तुम मेरी बात सुनो। तुम्हारे पिता, माता अथवा अन्य गुरुजन तुम्हें (इस कामसे रोकनेमें) समर्थ नहीं हैं ।। १२ ।। सर्वान् कामयते यस्मात् कमेर्धातोश्च भाविनि । तस्मात् कन्येह सुश्रोणि स्वतन्त्रा वरवर्णिनि ।। १३ ।। सुन्दर भाववाली कुन्ती! 'कम्' धातुसे कन्या शब्दकी सिद्धि होती है। सुन्दरी! वह (स्वयंवरमें आये हुए) सब वरोंमेंसे किसीको भी स्वतन्त्रतापूर्वक अपनी कामनाका विषय बना सकती है; इसीलिये इस जगत्‌में उसे कन्या कहा गया है ।। १३ ।।