भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 2158, कुल 2580 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2158

देवी बोली—महाबाहु राजा युधिष्ठिर! मेरी बात सुनो। समर्थ राजन्! शीघ्र ही तुम्हें

संग्राममें विजय प्राप्त होगी। मेरे प्रसादसे कौरवसेनाको जीतकर उसका संहार करके तुम

निष्कण्टक राज्य करोगे और पुनः इस पृथ्वीका सुख भोगोगे। राजन्! तुम्हें भाइयोंसहित

पूर्ण प्रसन्नता प्राप्त होगी ।। २७—२९ ।।

मत्प्रसादाच्च ते सौख्यमारोग्यं च भविष्यति ।

ये च संकीर्तयिष्यन्ति लोके विगतकल्मषाः ।। ३० ।।

तेषां तुष्टा प्रदास्यामि राज्यमायुर्वपुः सुतम् ।

प्रवासे नगरे चापि संग्रामे शत्रुसंकटे ।। ३१ ।।

अटव्यां दुर्गकान्तारे सागरे गहने गिरौ ।

ये स्मरिष्यन्ति मां राजन् यथाहं भवता स्मृता ।। ३२ ।।

न तेषां दुर्लभं किंचिदस्मिँल्लोके भविष्यति ।

इदं स्तोत्रवरं भक्त्या शृणुयाद् वा पठेत् वा ।। ३३ ।।

तस्य सर्वाणि कार्याणि सिद्धिं यास्यन्ति पाण्डवाः ।

मत्प्रसादाच्च वः सर्वान् विराटनगरे स्थितान् ।। ३४ ।।

न प्रज्ञास्यन्ति कुरवो नरा वा तन्निवासिनः ।

इत्युक्त्वा वरदा देवी युधिष्ठिरमरिंदमम् ।

रक्षां कृत्वा च पाण्डूनां तत्रैवान्तरधीयत ।। ३५ ।।

मेरी कृपासे तुम्हें सुख और आरोग्य सुलभ होगा। लोकमें जो मनुष्य मेरा कीर्तन और

स्तवन करेंगे, वे पापरहित होंगे और मैं संतुष्ट होकर उन्हें राज्य, बड़ी आयु, नीरोग शरीर

और पुत्र प्रदान करूँगी। राजन्! जैसे तुमने मेरा स्मरण किया है, इसी प्रकार जो लोग

परदेशमें रहते समय, नगरमें, युद्धमें, शत्रुओंद्वारा संकट प्राप्त होनेपर, घने जंगलोंमें, दुर्गम

मार्गमें, समुद्रमें तथा गहन पर्वतपर भी मेरा स्मरण करेंगे, उनके लिये इस संसारमें कुछ भी

दुर्लभ न होगा। पाण्डवो! जो इस उत्तम स्तोत्रको भक्तिभावसे सुनेगा या पढ़ेगा, उसके

सम्पूर्ण कार्य सिद्ध हो जायँगे। मेरे कृपाप्रसादसे विराटनगरमें रहते समय तुम सब लोगोंको

कौरवगण अथवा उस नगरके निवासी मनुष्य नहीं पहचान सकेंगे। शत्रुओंका दमन

करनेवाले राजा युधिष्ठिरसे ऐसा कहकर वरदायिनी देवी दुर्गा पाण्डवोंकी रक्षाका भार ले

वहीं अन्तर्धान हो गयी ।।

इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि पाण्डवप्रवेशपर्वणि दुर्गास्तवे षष्ठोऽध्यायः ।। ६ ।।

इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत पाण्डवप्रवेशपर्वमें दुर्गास्तोत्रविषयक छठा

अध्याय पूरा हुआ ।। ६ ।।

महाभारत (खंड २) - वन पर्व · पृष्ठ 2158, कुल 2580 में से · BharatKosha