भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 2399, कुल 2580 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2399

नकुलस्यैष निस्त्रिंशो गुरुभारसहो दृढः ॥ २२ ॥
जो बकरेके चमड़ेकी बनी हुई म्यानमें बंद है तथा नाना प्रकारके युद्धोंमें शस्त्रोंका भारी आघात सहन करनेमें समर्थ और मजबूत है, वह यह नकुलका खड्ग है ॥

यस्त्वयं विपुलः खड्गो गव्ये कोशे समर्पितः ।
सहदेवस्य विद्ध्येनं सर्वभारसहं दृढम् ॥ २३ ॥

और यह जो गोचर्मकी म्यानमें रखा गया है, यह सहदेवका विशाल खड्ग है। इसे सब प्रकारके अघात-प्रत्याघात सहनेमें समर्थ और सुदृढ़ जानो ॥ २३ ॥

इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहे आयुधवर्णनं नाम
त्रिचत्वारिंशोऽध्यायः ॥ ४३ ॥

इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरगोग्रहके अवसरपर
आयुधवर्णनविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ४३ ॥

महाभारत (खंड २) - वन पर्व · पृष्ठ 2399, कुल 2580 में से · BharatKosha