भारतकोश
महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,580 पृष्ठ

पृष्ठ 2469, कुल 2580 में से

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पृष्ठ 2469

यह जो रथियोंकी सेनामें सोनेका कवच धारण किये तीसरी काम देने योग्य (बिना थकी-मांदी) सेनाके साथ विराजमान है, जिसकी ध्वजाके अग्रभागमें नागका चिह्न है और सोनेकी पताका फहरा रही है, यह धृतराष्ट्रपुत्र श्रीमान् राजा सुयोधन है ॥ ४८-४९ ॥ एतस्याभिमुखं वीर रथं पररथारुजम् । प्रापयस्वैष राजा हि प्रमाथी युद्धदुर्मदः ॥ ५० ॥ वीर! शत्रुओंके रथको तोड़ डालनेवाले अपने इस रथको तुम इसीके सम्मुख ले चलो। यह राजा शत्रुओंको मथ डालनेवाला तथा युद्धके लिये उन्मत्त रहनेवाला है ॥ ५० ॥ एष द्रोणस्य शिष्याणां शीघ्रास्त्रे प्रथमो मतः । एतस्य दर्शयिष्यामि शीघ्रास्त्रं विपुलं रणे ॥ ५१ ॥ यह शीघ्रतापूर्वक अस्त्र चलानेमें आचार्य द्रोणके शिष्योंमें प्रथम माना गया है। इस युद्धमें आज मैं इसे शीघ्र अस्त्र चलानेकी विपुल कलाका दर्शन कराऊँगा ॥ नागकक्षा तु रुचिरा ध्वजाग्रे यस्य तिष्ठति । एष वैकर्तनः कर्णो विदितः पूर्वमेव ते ॥ ५२ ॥ जिसकी ध्वजाके अग्रभागपर हाथी या उसकी साँकलके चिह्नसे युक्त पताका फहरा रही है, यह विकर्तनपुत्र कर्ण है। इससे तुम पहले ही परिचित हो चुके हो ॥ ५२ ॥ एतस्य रथमास्थाय राधेयस्य दुरात्मनः । यत्तो भवेथाः संग्रामे स्पर्धते हि सदा मया ॥ ५३ ॥ इस दुरात्मा राधापुत्रके रथके निकट जाकर सावधान हो जाना। यह सदा युद्धमें मेरे साथ स्पर्धा रखता है ॥ ५३ ॥ यस्तु नीलानुसारेण पञ्चतारेण केतुना । हस्तावापी बृहद्धन्वा रथे तिष्ठति वीर्यवान् ॥ ५४ ॥ यस्य तारार्कचित्रोऽसौ ध्वजो रथवरे स्थितः । यस्यैतत् पाण्डुरं छत्रं विमलं मूर्ध्नि तिष्ठति ॥ ५५ ॥ महतो रथवंशस्य नानाध्वजपताकिनः । बलाहकाग्रे सूर्यो वा य एष प्रमुखे स्थितः ॥ ५६ ॥ हैमं चन्द्रार्कसंकाशं कवचं यस्य दृश्यते । जातरूपशिरस्त्राणं मनस्तापयतीव मे ॥ ५७ ॥ एष शान्तनवो भीष्मः सर्वेषां नः पितामहः । राजश्रियाभिवृद्धश्च सुयोधनवशानुगः ॥ ५८ ॥ जो नीले रंगकी पाँच तारोंके चिह्नसे सुशोभित पताकावाले रथपर बैठे हुए हैं, जिनका धनुष विशाल है, जिन्होंने हाथोंमें दस्ताने पहन रखे हैं, जिनका वह तारों और सूर्यके चिह्नोंसे विचित्र शोभा धारण करनेवाला ध्वज फहरा रहा है, जिनके मस्तकपर श्वेत रंगका उज्ज्वल छत्र सुशोभित है, जो नाना प्रकारकी ध्वजा-पताकाओंसे उपलक्षित रथियोंकी

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