महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1162, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंउल्काश्च शतशः पेतुः सनिर्घाताः सकम्पनाः । अर्कं च सहसा दीप्तं स्वर्भानुरभिसंवृणोत् ॥ २२ ॥ बिजलीकी गड़गड़ाहटके समान सैकड़ों उल्कापात होने लगे। भूकम्प आ गया। अपनी किरणोंसे उद्भासित होनेवाले सूर्यदेवको राहुने सब ओरसे सहसा घेर लिया ॥ २२ ॥
ववुश्च वाताः परुषाश्चलिता च वसुन्धरा । गृध्रा बलाश्च कङ्काश्च परिपेतुर्मुदा युताः ॥ २३ ॥ वायु तीव्र वेगसे बहने लगी, धरती डोलने लगी, गीध, कौवे और कंक प्रसन्नतापूर्वक सब ओर उड़ने लगे ॥ २३ ॥
दीप्तायां दिशि गोमायुर्दारुणं मुहुरुन्नदत् । अनाहता दुन्दुभयो विनेदुर्भृशनिःस्वनाः ॥ २४ ॥ दिशाओंमें दाह-सा होने लगा, गीदड़ बार-बार भयंकर बोली बोलने लगा, दुन्दुभियाँ बिना बजाये ही जोर-जोरसे बजने लगीं ॥ २४ ॥
एतदौत्पातिकं सर्वं घोरमासीद् भयंकरम् । विसंज्ञकल्पे धरणीं गते रामे महात्मनि ॥ २५ ॥ इस प्रकार महात्मा परशुरामके मूर्च्छित होकर पृथ्वीपर गिरते ही ये समस्त उत्पातसूचक अत्यन्त भयंकर अपशकुन होने लगे ॥ २५ ॥
ततो वै सहसोत्थाय रामो मामभ्यवर्तत । पुनर्युद्धाय कौरव्य विह्वलः क्रोधमूर्च्छितः ॥ २६ ॥ कुरुनन्दन! इसी समय परशुरामजी सहसा उठकर क्रोधसे मूर्च्छित एवं विह्वल हो पुनः युद्धके लिये मेरे समीप आये ॥ २६ ॥
आददानो महाबाहुः कार्मुकं तालसंनिभम् । ततो मय्याददानं तं राममेव न्यवारयन् ॥ २७ ॥ महर्षयः कृपायुक्ताः क्रोधाविष्टोऽथ भार्गवः । स मेऽहरदमेयात्मा शरं कालानलोपमम् ॥ २८ ॥ परशुराम ताड़के समान विशाल धनुष लिये हुए थे। जब वे मेरे लिये बाण उठाने लगे, तब दयालु महर्षियोंने उन्हें रोक दिया। वह बाण कालाग्निके समान भयंकर था। अमेयस्वरूप भार्गवने कुपित होनेपर भी मुनियोंके कहनेसे उस बाणका उपसंहार कर लिया ॥
ततो रविर्मन्दमरीचिमण्डलो ** जगामास्तं पांसुपुञ्जावगूढः ।** निशाव्यगाहत सुखशीतमारुता ** ततो युद्धं प्रत्यवहारयावः ॥ २९ ॥**