भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 1179

आपने नाना प्रकारके दिव्यास्त्र भी प्रकट किये हैं ।। ७ ।। न चैव शक्यते युद्धे विशेषयितुमन्ततः । न चाहमेनं यास्यामि पुनर्भीष्मं कथंचन ।। ८ ।। 'परंतु अन्ततोगत्वा आप युद्धमें उनकी अपेक्षा अपनी विशेषता स्थापित न कर सके। मैं भी अब किसी प्रकार पुनः भीष्मके पास नहीं जाऊँगी ।। ८ ।। गमिष्यामि तु तत्राहं यत्र भीष्मं तपोधन । समरे पातयिष्यामि स्वयमेव भृगूद्वह ।। ९ ।। 'भृगुश्रेष्ठ तपोधन! अब मैं वहीं जाऊँगी, जहाँ ऐसी बन सकूँ कि समरभूमिमें स्वयं ही भीष्मको मार गिराऊँ' ।। ९ ।। एवमुक्त्वा ययौ कन्या रोषव्याकुललोचना । तापस्ये धृतसंकल्पा सा मे चिन्तयती वधम् ।। १० ।। ऐसा कहकर रोषभरे नेत्रोंवाली वह राजकन्या मेरे वधके उपायका चिन्तन करती हुई तपस्याके लिये दृढ़ संकल्प लेकर वहाँसे चली गयी ।। १० ।। ततो महेन्द्रं सह तैर्मुनिभिर्भृगुसत्तमः । यथाऽऽगतं तथा सोऽगान्मामुपामन्त्र्य भारत ।। ११ ।। भारत! तदनन्तर भृगुश्रेष्ठ परशुरामजी उन महर्षियोंके साथ मुझसे विदा ले जैसे आये थे, वैसे ही महेन्द्र पर्वतपर चले गये ।। ११ ।। ततो रथं समारुह्य स्तूयमानो द्विजातिभिः । प्रविश्य नगरं मात्रे सत्यवत्यै न्यवेदयम् ।। १२ ।। यथावृत्तं महाराज सा च मां प्रत्यनन्दत । पुरुषांश्चादिशं प्राज्ञान् कन्यावृत्तान्तकर्मणि ।। १३ ।। महाराज! तत्पश्चात् मैंने भी ब्राह्मणके मुखसे अपनी प्रशंसा सुनते हुए रथपर आरूढ़ हो हस्तिनापुरमें आकर माता सत्यवतीसे सब समाचार यथार्थरूपसे निवेदन किया। माताने भी मेरा अभिनन्दन किया। इसके बाद मैंने कुछ बुद्धिमान् पुरुषोंको उस कन्याके वृत्तान्तका पता लगानेके कार्यमें नियुक्त कर दिया ।। १२-१३ ।। दिवसे दिवसे ह्यस्या गतिजल्पितचेष्टितम् । प्रत्याहरंश्च मे युक्ताः स्थिताः प्रियहिते सदा ।। १४ ।। मेरे लगाये हुए गुप्तचर सदा मेरे प्रिय एवं हितमें संलग्न रहनेवाले थे। वे प्रतिदिन उस कन्याकी गतिविधि, बोलचाल और चेष्टाका समाचार मेरे पास पहुँचाया करते थे ।। १४ ।। यदैव हि वनं प्रायात् सा कन्या तपसे धृता । तदैव व्यथितो दीनो गतचेता इवाभवम् ।। १५ ।। जिस दिन वह कन्या तपस्याका निश्चय करके वनमें गयी, उसी दिन मैं व्यथित, दीन और अचेत-सा हो गया ।। १५ ।।