भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 1265

धनुःसंस्थे महाराज द्वे वर्षे दक्षिणोत्तरे । इलावृतं मध्यमं तु पञ्च वर्षाणि चैव हि ॥ ३८ ॥ महाराज! दक्षिण और उत्तरके क्रमशः भारत और ऐरावत नामक दो वर्ष धनुषकी दो कोटियोंके समान स्थित हैं और बीचमें पाँच वर्ष (श्वेत, हिरण्यक, इलावृत, हरिवर्ष तथा हैमवत) हैं। इन सबके बीचमें इलावृतवर्ष है ॥ ३८ ॥

उत्तरोत्तरमेतेभ्यो वर्षमुद्रिच्यते गुणैः । आयुःप्रमाणमारोग्यं धर्मतः कामतोऽर्थतः ॥ ३९ ॥ भारतसे आरम्भ करके ये सभी वर्ष आयुके प्रमाण, आरोग्य, धर्म, अर्थ और काम—इन सभी दृष्टियोंसे गुणोंमें उत्तरोत्तर बढ़ते गये हैं ॥ ३९ ॥

समन्वितानि भूतानि तेषु वर्षेषु भारत । एवमेषा महाराज पर्वतैः पृथिवी चिता ॥ ४० ॥ भारत! इन सब वर्षोंमें निवास करनेवाले प्राणी परस्पर मिल-जुलकर रहते हैं। महाराज! इस प्रकार यह सारी पृथ्वी पर्वतोंद्वारा स्थिर की गयी है ॥ ४० ॥

हेमकूटस्तु सुमहान् कैलासो नाम पर्वतः । यत्र वैश्रवणो राजन् गुह्यकैः सह मोदते ॥ ४१ ॥ राजन्! विशाल पर्वत हेमकूट ही कैलास नामसे प्रसिद्ध है। जहाँ कुबेर गुह्यकोंके साथ सानन्द निवास करते हैं ॥ ४१ ॥

अस्त्युत्तरेण कैलासं मैनाकं पर्वतं प्रति । हिरण्यशृङ्गः सुमहान् दिव्यो मणिमयो गिरिः ॥ ४२ ॥ कैलाससे उत्तर मैनाक है और उससे भी उत्तर दिव्य तथा महान् मणिमय पर्वत हिरण्यशृंग है ॥ ४२ ॥

तस्य पार्श्वे महत् दिव्यं शुभ्रं काञ्चनवालुकम् । रम्यं बिन्दुसरो नाम यत्र राजा भगीरथः ॥ ४३ ॥ द्रष्टुं भागीरथीं गङ्गामुवास बहुलाः समाः । उसीके पास विशाल, दिव्य, उज्ज्वल तथा कांचनमयी बालुकासे सुशोभित रमणीय बिन्दुसरोवर है, जहाँ राजा भगीरथने भागीरथी गंगाका दर्शन करनेके लिये बहुत वर्षोंतक निवास किया था ॥ ४३ १/२ ॥

यूपा मणिमयास्तत्र चैत्याश्चापि हिरण्मयाः ॥ ४४ ॥ तत्रेष्ट्वा तु गतः सिद्धिं सहस्राक्षो महायशाः । वहाँ बहुत-से मणिमय यूप तथा सुवर्णमय चैत्य (महल) शोभा पाते हैं। वहीं यज्ञ करके महायशस्वी इन्द्रने सिद्धि प्राप्त की थी ॥ ४४ १/२ ॥

स्रष्टा भूतपतिर्यत्र सर्वलोकैः सनातनः ॥ ४५ ॥ उपास्यते तिग्मतेजा यत्र भूतैः समन्ततः ।