महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1740, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंबलेन चतुरङ्गेण गाङ्गेयमन्वपालयन् । राजा दुर्योधनकी यह बात सुनकर सब महारथी बड़ी उतावलीके साथ वहाँ आये और चतुरङ्गिणी सेनाद्वारा गंगानन्दन भीष्मकी रक्षा करने लगे ।। ६२ १/२ ।।
बाह्लीकः कृतवर्मा च शलः शल्यश्च भारत ।। ६३ ।। जलसंधो विकर्णश्च चित्रसेनो विविंशतिः । त्वरमाणास्त्वराकाले परिवार्य समन्ततः ।। ६४ ।। शस्त्रवृष्टिं सुतुमुलां श्वेतस्योपर्यपातयन् । भारत! बाह्लीक, कृतवर्मा, शल, शल्य, जलसंध, विकर्ण, चित्रसेन और विविंशति—इन सबने शीघ्रताके अवसरपर शीघ्रता करते हुए चारों ओरसे भीष्मजीको घेर लिया और श्वेतके ऊपर भयंकर शस्त्र-वर्षा करने लगे ।। ६३-६४ १/२ ।।
तान् क्रुद्धो निशितैर्बाणैस्त्वरमाणो महारथः ।। ६५ ।। अवारयदमेयात्मा दर्शयन् पाणिलाघवम् । तब अपरिमित आत्मबलसे सम्पन्न महारथी श्वेतने अपने हाथोंकी फुर्ती दिखाते हुए बड़ी उतावलीके साथ क्रोधपूर्वक पैने बाणोंद्वारा उन सबको रोक दिया ।। ६५ १/२ ।।
स निवार्य तु तान् सर्वान् केसरी कुञ्जरानिव ।। ६६ ।। महता शरवर्षेण भीष्मस्य धनुरच्छिनत् । जैसे सिंह हाथियोंके समूहको आगे बढ़नेसे रोक देता है, उसी प्रकार उन सभी महारथियोंको रोककर भारी बाणवर्षाके द्वारा श्वेतने भीष्मका धनुष काट दिया ।। ६६ १/२ ।।
ततोऽन्यद् धनुरादाय भीष्मः शान्तनवो युधि ।। ६७ ।। श्वेतं विव्याध राजेन्द्र कङ्कपत्रैः शितैः शरैः । राजेन्द्र! तब शान्तनुनन्दन भीष्मने दूसरा धनुष लेकर युद्धस्थलमें कंकपत्रयुक्त पैने बाणोंद्वारा श्वेतको घायल कर दिया ।। ६७ १/२ ।।
ततः सेनापतिः क्रुद्धो भीष्मं बहुभिरायसैः ।। ६८ ।। विव्याध समरे राजन् सर्वलोकस्य पश्यतः । राजन्! तब सेनापति श्वेतने कुपित हो उस समरभूमिमें बहुत-से लौहमय बाणोंद्वारा सब लोगोंके देखते-देखते भीष्मको क्षत-विक्षत कर दिया ।। ६८ १/२ ।।
ततः प्रव्यथितो राजा भीष्मं दृष्ट्वा निवारितम् ।। ६९ ।। प्रवीरं सर्वलोकस्य श्वेतेन युधि वै तदा । निष्ठानकश्च सुमहांस्तव सैन्यस्य चाभवत् ।। ७० ।। श्वेतने सम्पूर्ण विश्वके विख्यात वीर भीष्मको युद्धमें आगे बढ़नेसे रोक दिया, यह देखकर राजा दुर्योधनके मनमें बड़ी व्यथा हुई। साथ ही आपकी सेनामें सब लोगोंपर महान् भय छा गया ।। ६९-७० ।।
तं वीरं वारितं दृष्ट्वा श्वेतेन शरविक्षतम् ।