भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 1747

जैसे डूबता हुआ सूर्य अपनी प्रभा साथ लेकर शीघ्र ही अस्त हो जाता है, उसी प्रकार वह बाण श्वेतके शरीरसे उसके प्राण लेकर चला गया ।। ११४ ½ ।।
तं भीष्मेण नरव्याघ्रं तथा विनिहतं युधि ।। ११५ ।।
प्रपतन्तमपश्याम गिरेः शृङ्गमिव च्युतम् ।
भीष्मके द्वारा मारे गये नरश्रेष्ठ श्वेतको युद्धस्थलमें हमने देखा। वह टूटकर गिरे हुए पर्वतके समान जान पड़ता था ।। ११५ ½ ।।
अशोचन् पाण्डवास्तत्र क्षत्रियाश्च महारथाः ।। ११६ ।।
प्रहृष्टाश्च सुतास्तुभ्यं कुरवश्चापि सर्वशः ।
महारथी पाण्डव तथा उस दलके दूसरे क्षत्रिय श्वेतके लिये शोकमें डूब गये। इधर आपके पुत्र समस्त कौरव हर्षसे उल्लसित हो उठे ।। ११६ ½ ।।
ततो दुःशासनो राजन् श्वेतं दृष्ट्वा निपातितम् ।। ११७ ।।
वादित्रनिनदैर्घोरैर्नृत्यति स्म समन्ततः ।
राजन्! श्वेतको मारा गया देख आपका पुत्र दुःशासन बाजे-गाजेकी भयंकर ध्वनिके साथ चारों ओर नाचने लगा ।। ११७ ½ ।।
तस्मिन् हते महेष्वासे भीष्मेणाहवशोभिना ।। ११८ ।।
प्रावेपन्त महेष्वासाः शिखण्डिप्रमुखा रथाः ।
संग्रामभूमिमें शोभा पानेवाले भीष्मजीके द्वारा महाधनुर्धर श्वेतके मारे जानेपर शिखण्डी आदि महाधनुर्धर रथी भयके मारे काँपने लगे ।। ११८ ½ ।।
ततो धनंजयो राजन् वार्ष्णेयश्चापि सर्वशः ।। ११९ ।।
अवहारं शनैश्चक्रुर्निहते वाहिनीपतौ ।
ततोऽवहारः सैन्यानां तव तेषां च भारत ।। १२० ।।
राजन्! तब सेनापति श्वेतके मारे जानेके कारण अर्जुन और श्रीकृष्णने धीरे-धीरे अपनी सेनाको युद्धभूमिसे पीछे हटा लिया। भारत! फिर आपकी और पाण्डवोंकी सेना भी उस समय युद्धसे विरक्त हो गयी ।। ११९-१२० ।।
तावकानां परेषां च नर्दतां च मुहुर्मुहुः ।
पार्था विमनसो भूत्वा न्यवर्तन्त महारथाः ।
चिन्तयन्तो वधं घोरं द्वैरथेन परंतपाः ।। १२१ ।।
उस समय आपके और शत्रुपक्षके सैनिक भी बारंबार गर्जना कर रहे थे। उस द्वैरथ युद्धमें जो भयंकर संहार हुआ था, उसके लिये चिन्ता करते हुए शत्रुसंतापी पाण्डव महारथी उदास मनसे शिविरमें लौट आये ।। १२१ ।।

इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि श्वेतवधे अष्टचत्वारिंशोऽध्यायः ।।
४८ ।।