भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1768, कुल 2343 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1768

विदर्भैर्मेकलैश्चैव कर्णप्रावरणैरपि । सहिताः सर्वसैन्येन भीष्ममाहवशोभिनम् ॥ १३ ॥ गान्धाराः सिन्धुसौवीराः शिबयोऽथ वसातयः । उनके पीछे प्रतापी वीर महाधनुर्धर द्रोणाचार्यने युद्धके लिये प्रस्थान किया। महाराज! उस समय कुन्तल, दशार्ण, मागध, विदर्भ, मेकल तथा कर्णप्रावरण आदि देशोंके सैनिकोंके साथ गान्धार, सिन्धु, सौवीर, शिबि तथा वसाति देशोंके वीर क्षत्रिय युद्धमें शोभा पानेवाले भीष्मकी रक्षा करने लगे ॥ १२-१३ १/२ ॥

शकुनिश्च स्वसैन्येन भारद्वाजमपालयत् ॥ १४ ॥ ततो दुर्योधनो राजा सहितः सर्वसोदरैः । अश्वातकैर्विकर्णैश्च तथा चाम्बष्ठकोसलैः ॥ १५ ॥ दरदैश्च शकैश्चैव तथा क्षुद्रकमालवैः । अभ्यरक्षत संहृष्टः सौबलेयस्य वाहिनीम् ॥ १६ ॥ शकुनिने अपनी सेना साथ लेकर द्रोणाचार्यकी रक्षामें योग दिया। तत्पश्चात् अपने भाइयोंसहित राजा दुर्योधन अत्यन्त हर्षमें भरकर अश्वातक, विकर्ण, अम्बष्ठ, कोसल, दरद, शक, क्षुद्रक तथा मालव आदि देशोंके योद्धाओंके साथ सुबलपुत्र शकुनिकी सेनाका संरक्षण करने लगा ॥ १४—१६ ॥

भूरिश्रवाः शलः शल्यो भगदत्तश्च मारिषः । विन्दानुविन्दावावन्त्यौ वामं पार्श्वमपालयन् ॥ १७ ॥ सौमदत्तिः सुशर्मा च काम्बोजश्च सुदक्षिणः । श्रुतायुश्चाच्युतायुश्च दक्षिणं पक्षमास्थिताः ॥ १८ ॥ भूरिश्रवा, शल, शल्य, आदरणीय राजा भगदत्त तथा अवन्तीके राजकुमार विन्द और अनुविन्द उस सारी सेनाके वामभागकी रक्षा कर रहे थे। सोमदत्तपुत्र भूरि, त्रिगर्तराज सुशर्मा, काम्बोजराज सुदक्षिण, श्रुतायु तथा अच्युतायु—ये दक्षिणभागमें स्थित होकर उस सेनाकी रक्षा कर रहे थे ॥ १७-१८ ॥

अश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः । महत्या सेनया सार्धं सेनापृष्ठे व्यवस्थिताः ॥ १९ ॥ अश्वत्थामा, कृपाचार्य तथा सात्वतवंशी कृतवर्मा अपनी विशाल सेनाके साथ कौरव-सेनाके पृष्ठभागमें खड़े होकर उसका संरक्षण करते थे ॥ १९ ॥

पृष्ठगोपास्तु तस्यासन् नानादेश्या जनेश्वराः । केतुमान् वसुदानश्च पुत्रः काश्यस्य चाभिभूः ॥ २० ॥ केतुमान्, वसुदान, काशिराजके पुत्र अभिभू तथा अन्य अनेक देशोंके नरेश सेना पृष्ठके पोषक थे ॥ २० ॥

ततस्ते तावकाः सर्वे हृष्टा युद्धाय भारत ।