भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1893, कुल 2343 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1893

जनेश्वर! निरन्तर किये जानेवाले उसी पाप-कर्मका इस समय यह अत्यन्त भयंकर

फल प्राप्त हुआ है ।। २३ ।।

स त्वं भुङ्क्ष्व महाराज सपुत्रः ससुहृज्जनः ।

नावबुध्यसि यद् राजन् वार्यमाणः सुहृज्जनैः ।। २४ ।।

महाराज! आप सुहृदोंके मना करनेपर भी जो ध्यान नहीं देते हैं, इससे अब स्वयं ही

पुत्रों और सुहृदोंसहित अपनी अनीतिका फल भोगिये ।। २४ ।।

विदुरेणाथ भीष्मेण द्रोणेन च महात्मना ।

तथा मया चाप्यसकृद् वार्यमाणो न बुध्यसे ।। २५ ।।

विदुर, भीष्म तथा महात्मा द्रोणने और मैंने भी बारंबार आपको मना किया है; किंतु

आप कभी समझ नहीं पाते थे ।। २५ ।।

वाक्यं हितं च पथ्यं च मर्त्याः पथ्यमिवाौषधम् ।

पुत्राणां मतमाज्ञाय जितान् मन्यसि पाण्डवान् ।। २६ ।।

जैसे मरणासन्न मनुष्य हितकारी औषधको भी फेंक देते हैं, उसी प्रकार आपने

हमलोगोंके कहे हुए लाभकारी और हितकर वचनोंको भी ठुकरा दिया एवं अब अपने

पुत्रोंकी बातमें आकर यह मान रहे हैं कि हमने पाण्डवोंको जीत लिया ।। २६ ।।

शृणु भूयो यथातत्त्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसि ।

कारणं भरतश्रेष्ठ पाण्डवानां जयं प्रति ।। २७ ।।

तत् तेऽहं कथयिष्यामि यथाश्रुतमरिंदम ।

भरतश्रेष्ठ! आप पाण्डवोंकी विजय और अपनी पराजयका जो कारण पूछते हैं, उसके

विषयमें यथार्थ बातें सुनिये। शत्रुदमन! मैंने जैसा सुन रखा है, वह आपको बताऊँगा ।। २७

१/२ ।।

दुर्योधनेन सम्पृष्ट एतमर्थं पितामहः ।। २८ ।।

दृष्ट्वा भ्रातॄन् रणे सर्वान् निर्जितांस्तु महारथान् ।

शोकसम्मूढहृदयो निशाकाले स्म कौरवः ।। २९ ।।

पितामहं महाप्राज्ञं विनयेनोपगम्य ह ।

यदब्रवीत् सुतस्तेऽसौ तन्मे शृणु जनेश्वर ।। ३० ।।

दुर्योधनने यही बात पितामह भीष्मसे पूछी थी। महाराज! युद्धमें अपने समस्त महारथी

भाइयोंको पराजित हुआ देख आपके पुत्र कुरुराज दुर्योधनका हृदय शोकसे मोहित हो

गया। उसने रातमें महाज्ञानी पितामह भीष्मके पास विनयपूर्वक जाकर जो कुछ पूछा था,

वह बताता हूँ, मुझसे सुनिये ।। २८-३० ।।

दुर्योधन उवाच

द्रोणश्च त्वं च शल्यश्च कृपो द्रोणिस्तथैव च ।

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व · पृष्ठ 1893, कुल 2343 में से · BharatKosha