भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1929, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1929

गोपानां बहुसाहस्रैर्बलैर्गोपायनैर्वृतः ॥ १३ ॥ तत्पश्चात् काम्बोजराज सुदक्षिण काम्बोजदेशीय विशाल एवं शीघ्रगामी घोड़ोंपर आरूढ़ हो युद्धके लिये चले। उनके साथ गोपायन नामवाले कई हजार गोप-सैनिक थे ॥ १३ ॥ मद्रसौवीरगान्धारैस्त्रैगर्तैश्च विशाम्पते । सर्वकालिङ्गमुख्यैश्च कलिङ्गाधिपतिर्वृतः ॥ १४ ॥ प्रजानाथ! समस्त कलिङ्गदेशीय प्रमुख वीरोंसे घिरे हुए कलिंगराज भी युद्धके लिये आगे बढ़े। उनके साथ मद्र, सौवीर, गान्धार और त्रिगर्तदेशीय योद्धा भी मौजूद थे ॥ १४ ॥ नानानरगणैश्चैव दुःशासनपुरःसरः । जयद्रथश्च नृपतिः सहितः सर्वराजभिः ॥ १५ ॥ इनके सिवा राजा जयद्रथ सम्पूर्ण राजाओंको साथ ले दुःशासनको आगे करके चला। उसके साथ भी अनेक जनपदोंके लोगोंकी पैदल सेना मौजूद थी ॥ १५ ॥ हयारोहवराश्चैव तव पुत्रेण चोदिताः । चतुर्दश सहस्राणि सौबलं पर्यवारयन् ॥ १६ ॥ इसके सिवा आपके पुत्रकी आज्ञासे चौदह हजार अच्छे घुड़सवार सुबलपुत्र शकुनिको घेरकर खड़े हुए ॥ ततस्ते सहिताः सर्वे विभक्तरथवाहनाः । अर्जुनं समरे जघ्नुस्तावका भरतर्षभ ॥ १७ ॥ भरतश्रेष्ठ! फिर पृथक्-पृथक् रथ और वाहन लिये आपके पक्षके ये सब महारथी वीर समरांगणमें अर्जुनपर अस्त्र-शस्त्रोंका प्रहार करने लगे ॥ १७ ॥ (चेदिकाशिपदातैश्च रथैः पाञ्चालसृंजयैः । सहिताः पाण्डवाः सर्वे धृष्टद्युम्नपुरोगमाः ॥ तावकान् समरे जघ्नुर्धर्मपुत्रेण चोदिताः ।) इधर चेदि और काशिदेशके पैदलसैनिकोंके तथा पांचाल और सृंजयदेशके रथियोंसहित धृष्टद्युम्न आदि समस्त पाण्डववीर धर्मपुत्र युधिष्ठिरकी आज्ञासे समरभूमिमें आपके सैनिकोंका संहार करने लगे। रथिभिर्वारणैश्चाश्वैः पादातैश्च समीरितम् । घोरमायोधनं चक्रे महाभ्रसदृशं रजः ॥ १८ ॥ रथियों, हाथियों, घोड़ों और पैदलोंके पैरोंसे उड़ी हुई धूलराशिने मेघोंकी भारी घटाके समान आकाशमें व्याप्त होकर उस युद्धको भयंकर बना दिया ॥ १८ ॥ तोमरप्रासनाराचगजाश्वरथयोधिनाम् । बलेन महता भीष्मः समसज्जत् किरीटिना ॥ १९ ॥