महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1947, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरंतु श्रेष्ठ धनुर्धर सत्यपराक्रमी शक्तिशाली सात्यकिने उन समस्त धनुर्धर योद्धाओंको अपने दिव्यास्त्रके द्वारा मार डाला ॥ ६ ॥
स कृत्वा दारुणं कर्म प्रगृहीतशरासनः । आससाद ततो वीरो भूरिश्रवसमाहवे ॥ ७ ॥ यह भयंकर कर्म करके फिर धनुष लिये वीर सात्यकिने युद्धस्थलमें भूरिश्रवापर आक्रमण किया ॥ ७ ॥
स हि संदृश्य सेनां ते युयुधानेन पातिताम् । अभ्यधावत संक्रुद्धः कुरूणां कीर्तिवर्धनः ॥ ८ ॥ सात्यकिने आपकी सेनाको मार गिराया है, यह देखकर कुरुकुलकी कीर्ति बढ़ानेवाला भूरिश्रवा अत्यन्त कुपित हो उनकी ओर दौड़ा ॥ ८ ॥
इन्द्रायुधसवर्णं तु विस्फार्य सुमहद् धनुः । सृष्टवान् वज्रसंकाशान् शरानाशीविषोपमान् ॥ ९ ॥ सहस्रशो महाराज दर्शयन् पाणिलाघवम् । उसका विशाल धनुष इन्द्रधनुषके समान बहुरंगा था। महाराज! उसे खींचकर भूरिश्रवाने अपने हस्त-लाघवका परिचय देते हुए वज्रके समान दुःसह और विषैले सर्पोंके तुल्य भयंकर सहस्रों बाण छोड़े ॥ ९ १/२ ॥
शरांस्तान् मृत्युसंस्पर्शान् सात्यकेश्च पदानुगाः ॥ १० ॥ न विषेहुस्तदा राजन् दुद्रुवुस्ते समन्ततः । विहाय सात्यकिं राजन् समरे युद्धदुर्मदम् ॥ ११ ॥ उन बाणोंका स्पर्श मृत्युके तुल्य था। राजन्! उस समय सात्यकिके साथ आये हुए सैनिक उन सायकोंका वेग न सह सके। नरेश्वर! युद्धभूमिमें वे रण-दुर्मद सात्यकिको वहीं छोड़कर सब ओर भाग निकले ॥
तं दृष्ट्वा युयुधानस्य सुता दश महाबलाः । महारथाः समाख्याताश्चित्रवर्मायुधध्वजाः ॥ १२ ॥ समासाद्य महेष्वासं भूरिश्रवसमाहवे । ऊचुः सर्वे सुसंरब्धा यूपकेतुं महारणे ॥ १३ ॥ सात्यकिके दस महाबलवान् पुत्र थे। उनके कवच, आयुध और ध्वज सभी विचित्र थे। वे सब-के-सब महारथी कहे जाते थे। वे युद्धस्थलमें यूपचिह्नित ध्वजवाले महारथी भूरिश्रवाको देखकर उसके पास आये और अत्यन्त क्रोधपूर्वक उससे इस प्रकार बोले — ॥ १२-१३ ॥
भो भोः कौरवदायाद सहास्माभिर्महाबल । एहि युध्यस्व संग्रामे समस्तैः पृथगेव वा ॥ १४ ॥