भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 1954, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 1954

राजन्! तब आपके ताऊ देवव्रतने पाण्डवोंका वह व्यूह देखकर उसके मुकाबलेमें अपनी सेनाको महान् क्रौंचव्यूहके रूपमें संगठित किया ॥ १५ ॥ तस्य तुण्डे महेष्वासो भारद्वाजो व्यरोचत । अश्वत्थामा कृपश्चैव चक्षुरासीन्नरेश्वर ॥ १६ ॥ उसकी चोंचके स्थानमें महाधनुर्धर द्रोणाचार्य सुशोभित हुए। नरेश्वर! अश्वत्थामा और कृपाचार्य नेत्रोंके स्थानमें खड़े हुए ॥ १६ ॥ कृतवर्मा तु सहितः काम्बोजवरबाह्लिकैः । शिरस्यासीन्नरश्रेष्ठः श्रेष्ठः सर्वधनुष्मताम् ॥ १७ ॥ काम्बोज और बाह्लिकदेशके उत्तम सैनिकोंके साथ समस्त धनुर्धरोंमें श्रेष्ठ नरप्रवर कृतवर्मा व्यूहके शिरोभागमें स्थित हुए ॥ १७ ॥ ग्रीवायां शूरसेनश्च तव पुत्रश्च मारिष । दुर्योधनो महाराज राजभिर्बहुभिर्वृतः ॥ १८ ॥ आर्य! महाराज! राजा शूरसेन तथा आपका पुत्र दुर्योधन—ये दोनों बहुत-से राजाओंके साथ क्रौंचव्यूहके ग्रीवाभागमें स्थित हुए ॥ १८ ॥ प्राग्ज्योतिषस्तु सहितो मद्रसौवीरकेकयैः । उरस्यभून्नरश्रेष्ठ महत्या सेनयावृतः ॥ १९ ॥ नरश्रेष्ठ! मद्र, सौवीर और केकय योद्धाओंके साथ विशाल सेनासे घिरे हुए प्राग्ज्योतिषपुरके राजा भगदत्त उस व्यूहके वक्षःस्थलमें स्थित हुए ॥ १९ ॥ स्वसेनया च सहितः सुशर्मा प्रस्थलाधिपः । वामपक्षं समाश्रित्य दंशितः समवस्थितः ॥ २० ॥ प्रस्थलाधिपति (त्रिगर्तराज) सुशर्मा कवच धारण करके अपनी सेनाके साथ व्यूहके वामपक्षका आश्रय लेकर खड़े थे ॥ २० ॥ तुषारा यवनाश्चैव शकाश्च सह चूचुपैः । दक्षिणं पक्षमाश्रित्य स्थिता व्यूहस्य भारत ॥ २१ ॥ भारत! तुषार, यवन, शक और चूचुपदेशके सैनिक व्यूहके दाहिने पक्षका आश्रय लेकर स्थित हुए ॥ श्रुतायुश्च शतायुश्च सौमदत्तिश्च मारिष । व्यूहस्य जघने तस्थू रक्षमाणाः परस्परम् ॥ २२ ॥ मारिष! श्रुतायु, शतायु तथा सोमदत्तकुमार भूरिश्रवा—ये परस्पर एक-दूसरेकी रक्षा करते हुए व्यूहके जघनप्रदेशमें स्थित हुए ॥ २२ ॥ ततो युद्धाय संजग्मुः पाण्डवाः कौरवैः सह । सूर्योदये महाराज ततो युद्धमभून्महत् ॥ २३ ॥