महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व
Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2027, कुल 2343 में से
संदर्भ में पढ़ेंपार्थके बलसे अभिभूत होकर वे विचित्ररूपधारी राजकुमार एक साथ ही पृथ्वीपर गिरकर नष्ट हो गये। उन राजपुत्रोंको युद्धमें मारा गया देख त्रिगर्तराज सुशर्माने रथके द्वारा अर्जुनपर आक्रमण किया ।। ४ ।। तेषां रथानामथ पृष्ठगोपा द्वात्रिंशदन्येऽभ्यपतन्त पार्थम् । तथैव ते तं परिवार्य पार्थं विकृष्य चापानि महारवाणि ।। ५ ।। अवीवृषन् बाणमहौघवृष्ट्या यथा गिरिं तोयधरा जलौघैः । सम्पीड्यमानस्तु शरौघवृष्ट्या धनंजयस्तान् युधि जातरोषः ।। ६ ।। उन राजपुत्रोंके रथोंके जो दूसरे-दूसरे बत्तीस पृष्ठरक्षक थे, वे भी (सुशर्माके साथ ही) अर्जुनपर टूट पड़े। इसी प्रकार उन सबने अर्जुनको चारों ओरसे घेरकर महान् टंकारध्वनि करनेवाले अपने धनुष खींचे और जैसे मेघ पर्वतपर जलराशिकी वर्षा करते हैं, उसी प्रकार अर्जुनपर बाणसमूहोंकी वृष्टि करने लगे। उनके बाणसमूहोंकी वर्षासे पीड़ित होकर युद्धस्थलमें अर्जुनके हृदयमें बड़ा भारी रोष हुआ ।। ५-६ ।। षष्ट्या शरैः संयति तैलधौतै- र्जघान तानप्यथ पृष्ठगोपान् । रथांश्च तांस्तानवजित्य संख्ये धनंजयः प्रीतमना यशस्वी ।। ७ ।। अथात्वरद् भीष्मवधाय जिष्णु- र्बलानि राजन् समरे निहत्य । उन्होंने रणक्षेत्रमें तेलके धोये हुए साठ बाण मारकर उन पृष्ठरक्षकोंका भी संहार कर दिया। इस प्रकार युद्धभूमिमें उन सभी रथियोंको जीतकर और कौरव-सेनाओंका समरमें संहार करके प्रसन्नचित्त हुए यशस्वी विजयी अर्जुनने भीष्मके वधके लिये शीघ्रता की ।। ७ १/२ ।। त्रिगर्तराजो निहतान् समीक्ष्य महात्मना तानथ बन्धुवर्गान् ।। ८ ।। रणे पुरस्कृत्य नराधिपांस्तान् जगाम पार्थं त्वरितो वधाय । महामना अर्जुनके द्वारा अपने बन्धुसमूहोंको मारा गया देख त्रिगर्तराज सुप्रसिद्ध नरपतियोंको युद्धके लिये आगे करके तुरंत ही अर्जुनका वध करनेके लिये उनके सामने आया ।। ८ १/२ ।।