भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

पृष्ठ 2058, कुल 2343 में से

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पृष्ठ 2058

तदनन्तर धर्मपुत्र युधिष्ठिरके आदेशसे क्रोधमें भरी हुई उनकी सारी सेनाएँ भीष्मपर ही टूट पड़ीं। वे भीष्मको मार डालना चाहती थीं ॥ १५ ॥ धृष्टद्युम्नः शिखण्डी च सात्यकिश्च महारथः । युक्तानीका महाराज भीष्ममेव समभ्ययुः ॥ १६ ॥ महाराज! धृष्टद्युम्न, शिखण्डी तथा महारथी सात्यकि—इन सबने अपनी सेनाओंके साथ भीष्मपर ही आक्रमण किया ॥ १६ ॥ विराटो द्रुपदश्चैव सहिताः सर्वसोमकैः । अभ्यद्रवन्त संग्रामे भीष्ममेव महारथम् ॥ १७ ॥ राजा विराट और सम्पूर्ण सोमकोंसहित द्रुपदने संग्राममें महारथी भीष्मपर ही चढ़ाई की ॥ १७ ॥ केकया धृष्टकेतुश्च कुन्तिभोजश्च दंशितः । युक्तानीका महाराज भीष्ममेव समभ्ययुः ॥ १८ ॥ नरेश्वर! केकय, धृष्टकेतु और कवचधारी कुन्तिभोज—इन सबने अपनी सेनाओंके साथ भीष्मपर ही धावा किया ॥ १८ ॥ अर्जुनो द्रौपदेयाश्च चेकितानश्च वीर्यवान् । दुर्योधनसमादिष्टान् राज्ञः सर्वान् समभ्ययुः ॥ १९ ॥ अर्जुन, द्रौपदीके पाँचों पुत्र और पराक्रमी चेकितान—ये दुर्योधनके भेजे हुए समस्त राजाओंपर चढ़ आये ॥ १९ ॥ अभिमन्युस्तथा शूरो हैडिम्बश्च महारथः । भीमसेनश्च संक्रुद्धस्तेऽभ्यधावन्त कौरवान् ॥ २० ॥ शूरवीर अभिमन्यु, महारथी घटोत्कच तथा क्रोधमें भरे हुए भीमसेन—इन सबने कौरवोंपर धावा किया ॥ २० ॥ त्रिधाभूतैरवध्यन्त पाण्डवैः कौरवा युधि । तथैव कौरवै राजन्नवध्यन्त परे रणे ॥ २१ ॥ राजन्! पाण्डवोंने तीन दलोंमें विभक्त होकर कौरवोंका वध आरम्भ किया। इसी प्रकार कौरव भी रणभूमिमें शत्रुओंका नाश करने लगे ॥ २१ ॥ द्रोणस्तु रथिनः श्रेष्ठान् सोमकान् सृंजयैः सह । अभ्यधावत संक्रुद्धः प्रेषयिष्यन् यमक्षयम् ॥ २२ ॥ द्रोणाचार्यने श्रेष्ठ रथी सोमकों और सृंजयोंको यमलोक भेजनेके लिये क्रोधपूर्वक उनके ऊपर धावा बोल दिया ॥ २२ ॥ तत्राक्रन्दो महानासीत् सृंजयानां महात्मनाम् । वध्यतां समरे राजन् भारद्वाजेन धन्विना ॥ २३ ॥