भारतकोश
महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

महाभारत (खंड ३) - विराट, उद्योग व भीष्म पर्व

Mahabharata (Vol 3) - Virata, Udyoga and Bhishma Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,343 पृष्ठ

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पृष्ठ 2111

यत्र तौ पुरुषव्याघ्रौ पितापुत्रौ महाबलौ । प्राग्ज्योतिषेण संयुक्तौ भीमसेनघटोत्कचौ ॥ ८० ॥ महाराज! इसी समय श्रीकृष्ण जिनके सारथि हैं, वे पाण्डुनन्दन अर्जुन सब ओरसे शत्रुओंका संहार करते हुए वहाँ आ पहुँचे, जहाँ वे दोनों पुरुषसिंह महाबली पिता-पुत्र भीमसेन और घटोत्कच भगदत्तके साथ युद्ध कर रहे थे ॥ ७९-८० ॥ दृष्ट्वा च पाण्डवो भ्रातॄन् युध्यमानान् महारथान् । त्वरितो भरतश्रेष्ठ तत्रायुध्यत् किरञ्छरान् ॥ ८१ ॥ भरतश्रेष्ठ! पाण्डुनन्दन अर्जुन अपने महारथी भाइयोंको युद्ध करते देख स्वयं भी बाणोंकी वर्षा करते हुए तुरंत ही युद्धमें प्रवृत्त हो गये ॥ ८१ ॥ ततो दुर्योधनो राजा त्वरमाणो महारथः । सेनामचोदयत् क्षिप्रं रथनागाश्वसंकुलाम् ॥ ८२ ॥ तब महारथी राजा दुर्योधनने बड़ी उतावलीके साथ रथ, हाथी और घोड़ोंसे भरी हुई अपनी सेनाको शीघ्र ही युद्धके लिये प्रेरित किया ॥ ८२ ॥ तामापतन्तीं सहसा कौरवाणां महाचमूम् । अभिदुद्राव वेगेन पाण्डवः श्वेतवाहनः ॥ ८३ ॥ कौरवोंकी उस विशाल वाहिनीको आती देख श्वेत घोड़ोंवाले पाण्डुपुत्र अर्जुन सहसा बड़े वेगसे उसकी ओर दौड़े ॥ ८३ ॥ भगदत्तश्च समरे तेन नागेन भारत । विमृद्नन् पाण्डवबलं युधिष्ठिरमुपादद्रवत् ॥ ८४ ॥ भारत! भगदत्तने भी समरभूमिमें उस हाथीके द्वारा पाण्डवसेनाको कुचलते हुए युधिष्ठिरपर धावा किया ॥ ८४ ॥ तदाऽऽसीत् सुमहद् युद्धं भगदत्तस्य मारिष । पञ्चालैः पाण्डवेयैश्च केकयैश्चोद्यतायुधैः ॥ ८५ ॥ आर्य! उस समय हथियार उठाये हुए पांचालों, पाण्डवों तथा केकयोंके साथ भगदत्तका बड़ा भारी युद्ध हुआ ॥ ८५ ॥ भीमसेनोऽपि समरे तावुभौ केशवार्जुनौ । अश्रावयद् यथावृत्तमिरावद्वधमुत्तमम् ॥ ८६ ॥ भीमसेनने भी समरभूमिमें श्रीकृष्ण और अर्जुन दोनोंको इरावान्के वधका यथावत् वृत्तान्त अच्छी तरह सुना दिया ॥ ८६ ॥

इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भगदत्तयुद्धे पञ्चनवतितमोऽध्यायः ॥ ९५ ॥